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आचार्य श्री विद्यासागर जी के प्रथम समाधि दिवस पर विनयांजलि सभा : आचार्य श्री के ग्रंथों का स्वाध्याय सच्ची विनयांजलि


गायत्री नगर में मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज का प्रथम समाधि दिवस मनाया गया। श्री दिगंबर जैन मंदिर महारानी फार्म में विनयांजलि दी गई। अष्टद्रव्य से भक्ति के साथ आचार्य श्री की सामूहिक पूजा की गई। जयपुर से उदयभान जैन की यह खबर…


जयपुर। श्री दिगंबर जैन मंदिर महारानी फार्म, गायत्री नगर में मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज का प्रथम समाधि दिवस माघ शुक्ला नवमी को सुबह 7:30 बजे विधानाचार्य पंडित अजित शास्त्री जी के निर्देशन में भक्ति भाव से श्री जी के अभिषेक, शांतिधारा कर विनयांजलि और पूजा का कार्यक्रम हुआ। प्रथम अभिषेक और शांतिधारा राकेश पाटोदी ने की। सहयोग राजेश बोहरा ने किया।

व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला
इस अवसर पर आचार्य श्री की तस्वीर के सामने मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष कैलाश छाबड़ा, उपाध्यक्ष अरुण शाह व मंत्री राजेश वोहरा ने दीप प्रज्वलन किया। मंगलाचरण सुनंदा अजमेरा ने किया। मंदिर प्रबंध समिति ने पंडित अजित शास्त्री, सिद्धार्थ टोंग्या और निलेश जैन पुजारी का स्वागत किया। अजित शास्त्री ने आचार्य श्री के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके जीवन के अनेक संस्मरण बताए।

आचार्य श्री ने अनेकों उपकार किए
अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने आचार्य श्री के प्रति विनयांजलि प्रस्तुत करते हुए कहा कि लोक में आचार्य श्री ने अनेकों उपकार किए हैं। उन्होंने गोशाला, हथकरघा को बढ़ावा दिया। भारत को भारत कहने के लिए भारत सरकार और प्रशासन पर विशेष जोर दिया। आचार्य श्री के रचित अनेकों ग्रंथ हैं। उनका स्वाध्याय करना सच्ची विनयांजलि होगी।

भजन के माध्यम से विनयांजलि
मंदिर प्रबंध समिति गायत्री नगर ने यहां विद्वान की व्यवस्था कर प्रतिदिन स्वाध्याय कक्षा चला रखी है उसका पूर्ण उपयोग हम सभी को उठाना चाहिए यही सच्ची विनयांजलि होगी। इस अवसर पर मंजू सेवा वाले ने भी भजन के माध्यम से विनयांजलि प्रस्तुत की।

अष्टद्रव्य से भक्ति की
सभा में सारस मल जी झांझरी ने आचार्य श्री के संबंध में संस्मरण लिखित रूप में प्रस्तुत किए। जिनका वाचन उपाध्यक्ष अरूण शाह द्वारा किया गया। सुंदर सजे हुए थालों में अष्टद्रव्य से भक्ति के साथ आचार्य श्री की सामूहिक पूजा की गई। सभा में आभार मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष कैलाश छाबड़ा ने माना। संचालन उपाध्यक्ष अरुण शाह ने किया।

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