दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन पंक्तियों में निहित अर्थ और संदेश अत्यंत गहरे होते हैं। एक दोहा छोटा सा होता है, लेकिन उसमें जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समाहित होती हैं। यह संक्षिप्तता के साथ गहरे विचारों को व्यक्त करने का एक अद्भुत तरीका है। दोहों का रहस्य कॉलम की बाइसवीं कड़ी में पढ़ें मंजू अजमेरा का लेख…
कबीरा सोया क्या करे, उठि न भजे भगवान।
जम जब घर ले जाएँगे, पड़ा रहेगा म्यान।
कबीर इस दोहे में हमें यह स्मरण कराते हैं कि जीवन अस्थायी है और मृत्यु किसी भी समय आ सकती है। “कब बुलावा आ जाए” यह कोई नहीं जानता। इसलिए हमें जीवन में आलस्य, अज्ञान और व्यर्थता से दूर रहकर जागरूक और सतर्क रहना चाहिए।
“पड़ी रहेगी म्यान” का अर्थ है कि शरीर, जो आत्मा का बाहरी आवरण है, नश्वर है। जब मृत्यु आएगी, तो केवल शरीर यहीं रह जाएगा, जबकि आत्मा अपने कर्मों के अनुसार आगे बढ़ेगी।
मृत्यु के समय कोई भी सांसारिक सुख, धन या भौतिक संपत्ति आपके साथ नहीं जाएगी। जो समय अभी हमारे पास है, वही आत्मज्ञान और ईश्वर के प्रति समर्पण के लिए उपयुक्त है।
अगर जीवन में आपने ईश्वर को जानने और अपनी आत्मा के सत्य को समझने की कोशिश नहीं की, तो मृत्यु के बाद यह अवसर नहीं मिलेगा।
यम (मृत्यु) का आगमन निश्चित है। जब मृत्यु आती है, तब कुछ भी अपने साथ नहीं ले जाया जा सकता। यह दोहा हमें यह समझने की प्रेरणा देता है कि हमें मृत्यु के भय से नहीं, बल्कि मृत्यु के पहले किए जाने वाले कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। मृत्यु का अपरिहार्य सत्य समझ लेना ही हमारा परम कर्तव्य है।













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