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पंचकल्याणक जैनेश्वरी दीक्षा महा महोत्सव 5 फरवरी से: मूर्तियों की होगी प्राण-प्रतिष्ठा दी जाएगी दीक्षा


सिहोनिया शांतिनाथ अतिशय क्षेत्र में भव्य पंचकल्याणक और जैनेश्वरी दीक्षा महा महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। यह 5 फरवरी से आरंभ होगा और 10 फरवरी को समापन होगा। आचार्य श्री वसुनंदी जी का 30 जनवरी से विहार होगा। अंबाह से पढ़िए सौरभ जैन की यह खबर…


अंबाह। शांतिनाथ अतिशय क्षेत्र सिहोनियाजी में भव्य पंचकल्याणक महोत्सव 05 फरवरी से 10 फरवरी तक होने जा रहा है। जैन समाज अंबाह के अध्यक्ष एवं सिहोनिया अतिशय क्षेत्र के परम संरक्षक जिनेश जैन ने बताया कि आचार्य वसुनंदी महाराज के सानिध्य में भव्य पंचकल्याणक महोत्सव के तहत कमल मंदिर, मानस्तंभ, श्री चंद्रप्रभु जिनालय सहित 31 फुट की खंडगासन भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा को सूर्य मंत्र देकर प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। 5 फरवरी को ध्वजारोहण के साथ पूर्व गर्भ कल्याण, 6 फरवरी को उत्तराध गर्भ कल्याणक, 7 फरवरी को जन्म कल्याणक और हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा, 8 फरवरी को तप कल्याणक, 9 फरवरी को ज्ञान कल्याणक, 10 फरवरी को मोक्ष कल्याणक कर प्रतिमा को विधि संस्कार कर के प्राण प्रतिष्ठा दी जाएगी।

बड़ी संख्या में आएंगे श्रद्धालु

सिहोनिया अतिशय क्षेत्र कमेटी के संरक्षक आशीष जैन सोनू ने बताया कि इस भव्य आयोजन में भारतवर्ष से रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु और राजनेता आएंगे। आने वाले सभी श्रद्धालुओं के आवास एवं भोजन की समुचित व्यवस्था अतिशय क्षेत्र में की जा रही है। मीडिया प्रभारी सौरभ जैन वरेह वाले ने बताया कि आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी महामुनिराज के हस्त कमलों से होने जा रही है। अतिशय क्षेत्र सिहोनियाजी में जिसमें दीक्षार्थी क्षुल्लिका श्री सुधर्मनंदनी माताजी आर्यिका दीक्षा 8 फरवरी को लेंगी।

आचार्य वसुनंदी का हो रहा विहार

30 जनवरी को आचार्य वसुनंदी ससंघ का विहार फिरोजाबाद से अंबाह होते हुए सिहोनिया अतिशय क्षेत्र के लिए होगा। अंबाह में भी 2 दिन का प्रवास रहेगा। सोनू मित्र मंडल और युवा मंडल के लोग आसपास के इलाकों में घर-घर जाकर जैन समाज के लोगों को आमंत्रित पत्रिका देकर कलश आबंटित कर रहे हैं।

सिहोनिया शांतिनाथ अतिशय क्षेत्र का इतिहास 

लगभग 80 वर्ष पूर्व गुमानी लाल ब्रह्मचारी को स्वप्न आया। उस स्वप्न के आधार पर अंबाह एवं मुरैना का जैन समाज वहां पहुंचा। वहां पर वह टीला उन्होंने चिन्हित किया। उसमें से श्री 1008 शांतिनाथ भगवान की 16 फीट और श्री 1008 कुंथुनाथ भगवान एवं श्री 1008 अरहनाथ भगवान की 10-10 फीट की प्रतिमाएं प्रकट हुई। जहां-जहां प्रतिमाएं प्रकट हुईं, वहीं पर मंदिर जी का निर्माण किया गया। क्षेत्रपाल बाबा की प्रतिमा भी भू-गर्भ से निकली थी। इस अतिशय क्षेत्र पर समय-समय पर अतिशय होते रहते हैं। काफी प्रतिमाएं भू-गर्भ से निकलती रहती हैं। कुछ प्रतिमा आज भी मंदिर में, मंदिर संग्रहालय और मुरैना पुरातत्व विभाग के संग्रहालय में रखी हुई है। हर साल कुंवार वदी दोज को महामस्तकाभिषेक का आयोजन किया जाता है। इस क्षेत्र का निर्माण सन् 1980 से शुरू हुआ एवं प्रथम बार सन 2003 में उपाध्याय श्री 108 ज्ञान सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न हुए। अब 2025 में आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी मुनिराज ससंघ (26 पिच्छी) के पावन सानिध्य में 31 फीट की उत्तंग श्री शांतिनाथ भगवान, नवनिर्मित कमल मन्दिर एवं श्री चंद्रप्रभु जिनालय के श्रीमजिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ बुधवार, 5 फरवरी 2025 से सोमवार, 10 फरवरी 2025 तक होने जा रहे हैं।

यह हैं अतिशय की दूरियां

यह अतिशय क्षेत्र अंबाह से क्षेत्र की दूरी 35 किमी., मुरैना से क्षेत्र की दूरी 31.5 किमी., ग्वालियर से क्षेत्र की दूरी 55 किमी., आगरा से क्षेत्र की दूरी 113 किमी., दिल्ली से क्षेत्र की दूरी 306 किमी है।

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