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भगवान बाहुबली की प्रतिमा पर छत्र रूपी छत का पूजन किया : नगर में विराजमान आर्यिका सुनय मति माताजी के सानिध्य में कार्यक्रम संपन्न 


सनावद नगर से तीन किलोमीटर दूर स्थित श्री दिगम्बर जैन श्री क्षेत्र सिद्धाचल पोदनपुरम में राष्ट्र गौरव आचार्य रत्न श्री 108 वर्धमानसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से एवं नगर में विराजमान प.पू. आर्यिका 105 श्री सुनयमति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में सवा सत्रह फिट उत्तुंग भगवान बाहुबली स्वामी की प्रतिमा के ऊपर छत्र रूपी छत भरने का शुभ मुहूर्त गुरुवार को संपन्न किया गया। पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट…


सनावद। सनावद नगर से तीन किलोमीटर दूर स्थित श्री दिगम्बर जैन श्री क्षेत्र सिद्धाचल पोदनपुरम में राष्ट्र गौरव आचार्य रत्न श्री 108 वर्धमानसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से एवं नगर में विराजमान प.पू. आर्यिका 105 श्री सुनयमति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में सवा सत्रह फिट उत्तुंग भगवान बाहुबली स्वामी की प्रतिमा के ऊपर छत्र रूपी छत भरने का शुभ मुहूर्त गुरुवार को संपन्न किया गया। सन्मति जैन काका ने बताया कि आर्यिका माताजी के सानिध्य में सर्वप्रथम भगवान के चरणों का अभिषेक किया गया। उसके बाद आर्यिका संघ की आहार चर्या क्षेत्र पर संपन्न हुई। वारिश जैन बताया कि नगर से 3 किलोमीटर दूर स्थित श्री दिगम्बर जैन श्री क्षेत्र सिद्धाचल पोदनपुरम में राष्ट्र गौरव आचार्य रत्न श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद यह क्षेत्र का निर्माण 21 वर्ष पूर्व में कराया गया था। यहां सवा सत्रह फीट ऊंची यह प्रतिमा पहाड़ी पर स्थित है। इस पर छत्र रूपी छत का निर्माण दानदातारों के सहयोग से निर्माण किया जा रहा है।

अहिंसा से सुख, त्याग से शांति, मैत्री से प्रगति और ध्यान से सिद्धि मिलती है – आर्यिका सुनयमति माताजी

इस अवसर पर आर्यिका सुनयमति माताजी ने अपनी देशना में कहा कि ऋषभदेव के दो पुत्र हुए जिनका नाम भरत और बाहुबली था। भगवान बाहुबली को विष्णु का अवतार माना जाता था। वे अयोध्या के राजा थे और उनकी दो रानियां थीं। एक रानी से 99 पुत्र और एक पुत्री तथा दूसरी से गोम्मटेश्वर भगवान बाहुबली तथा एक पुत्री सुंदरी थी। बाहुबली का अपने ही भाई भरत से उनके शासन, सत्ता के लोभ तथा चक्रवर्ती बनने की इच्छा के कारण दृष्टि युद्ध, जल युद्ध और मल्ल युद्ध हुआ था। इसमें बाहुबली विजयी रहे, लेकिन उनका मन ग्लानि से भर गया और उन्होंने सब कुछ त्यागकर तप करने का निर्णय लिया। अत्यंत कठिन तपस्या के बाद वे मोक्षगामी बने। जैन धर्म में भगवान बाहुबली को पहला मोक्षगामी माना जाता है। भगवान बाहुबली ने इंसान के आध्यात्मिक उत्थान और मानसिक शांति के लिए चार बातें बताई थीं। अहिंसा से सुख, त्याग से शांति, मैत्री से प्रगति और ध्यान से सिद्धि मिलती है।

ये सभी उपस्थित थे

इस अवसर पर सौभाग्यचंद जैन, सुभाषचंद जैन, सुरेश मुंशी, वारिश जैन, प्रशांत जैन, सुनील जैन, मुकेश जैन, यतीश जैन, रजनीश जैन, अचिंत्य जैन, देवेंद्र काका, विशाल जैन, नन्शी जैन सहित अनेक समाजजन उपस्थित थे।

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