धामनोद नगर में भगवान पार्श्वनाथ और चंद्रप्रभुजी के जन्म और तप कल्याणक के अवसर पर शांतिधारा और मस्तकाभिषेक किए गए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाज के धर्मावलंबी मौजूद रहे। पढ़िए धामनोद से यह खबर…
धामनोद। स्थानीय पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में गुरुवार को आठवें तीर्थंकर भगवान श्री चंद्रप्रभुजी का जन्म और तप कल्याणक तथा 23 वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का जन्म तप कल्याणक पूरी भक्ति भाव से मनाया गया। इस शुभ अवसर पर्व पर प्रथम अभिषेक टीम ने सुबह आनंद के साथ महोत्सव के रूप में कलशों की शांतिधारा की बोली लगाई और मस्तकाभिषेक किया।
इन्होंने भी लिया अभिषेक का लाभ
भगवान पार्श्वनाथ जी के मस्तकाभिषेक स्वर्ण कलश से अभिषेक का पुण्य लाभ प्रमिला सुरेशचंद जैन, चंद्र प्रभुजी का स्वर्ण कलश से अभिषेक का पुण्य का लाभ राजेश मुकेश जैन और शांतिधारा रजत से कलश से पार्श्वनाथ जी के मस्तक पर करने का दीपांशु सुरेंद्र जैन तथा चंद्रप्रभुजी के मस्तक पर करने का सौभाग्य सोमा राजेंद्र जैन को मिला।
प्राचीन मंदिर में भी हुआ अभिषेक
धामनोद से 2 किमी दूर स्थित 200 वर्ष प्राचीन मंदिर में भी मूलनायक श्री पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा पर स्वर्ण कलश से अभिषेक किया गया। शांतिधारा करने के लाभार्थी यश बाहुबली रहे। वे भगवान चंद्रप्रभु जी और पार्श्वनाथ की आरती करने के लाभार्थी बने।













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