श्री पद्मप्रभु दिगंबर जैन मंदिर, वैभव नगर में अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज के सानिध्य में 12 दिवसीय भक्तामर महामंडल विधान का पूर्णाहुति हवन सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री ने कहा कि जीवन बहुत छोटा है। इस छोटे से जीवन में हम बहुत कुछ करना चाहते हैं। याद रखना, यदि कुछ करना है तो हमें अपने आराध्य का प्रति समय स्मरण करना चाहिए, जिन्होंने हमें जन्म दिया। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। श्री पद्मप्रभु दिगंबर जैन मंदिर, वैभव नगर में अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज के सानिध्य में 12 दिवसीय भक्तामर महामंडल विधान का पूर्णाहुति हवन सम्पन्न हुआ। इस हवन का लाभ यज्ञ नायक बनने का सौभाग्य सरोज, सचिन, शिवानी, आर्शी, इवांशी को प्राप्त हुआ। मंडल पर जिनवाणी विराजमान करने का सौभाग्य कल्पना जैन जज साहब परिवार, के.के. जैन, अशोक पा, प्रमोद शोभना जैन, अमित जैन को प्राप्त हुआ।
हवन से पहले देव, शास्त्र और आचार्य श्री शांति सागर महाराज, आचार्य अभिनंदन सागर महाराज, आचार्य वर्धमान सागर महाराज, आचार्य श्री विद्या सागर महाराज, तथा अंतर्मुखी मुनि पूज्य महाराज का अष्ट द्रव्य से पूजन किया गया।
हवन से पूर्व 48 कलशों से भगवान का विशेष अभिषेक किया गया, और शांतिधारा करने का लाभ पी.सी. जैन, सुषमा, राहुल, तृप्ति, आध्या, मौलिक को प्राप्त हुआ। मुनि पूज्य सागर महाराज के पाद पक्षालन का सौभाग्य डी.के. जैन, अनीता जैन, मीनाक्षी, मनीष जैन, प्रतीक, एकलव्य जैन को प्राप्त हुआ।
अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर का धर्म प्रभाव रथ पांचवे पड़ाव का अंतिम भक्तामर विधान मंडल वैभव नगर में आयोजित किया गया। संपूर्ण विधि विधान का कार्य पंडित नितिन जैन और संगीतकार अंश जैन ने सफलतापूर्वक संपन्न किया।
अपने आराध्य का स्मरण करें
इस अवसर पर मुनि श्री ने कहा, “जीवन बहुत छोटा है। इस छोटे से जीवन में हम बहुत कुछ करना चाहते हैं। याद रखना, यदि कुछ करना है तो हमें अपने आराध्य का प्रति समय स्मरण करना चाहिए, जिन्होंने हमें जन्म दिया। आचार्य भगवंत कहते हैं कि हमारे जीवन का पहला गुरु माता-पिता हैं।
उनके संस्कार और संस्कृति हमारे भविष्य को निर्धारित करते हैं कि हमें कैसे संस्कार प्राप्त होते हैं और हमारी संस्कृति क्या होती है। माता-पिता की भूमिका का स्मरण करें, क्योंकि सच कहूं, इस दुनिया में उनसे बड़ा कोई नहीं हो सकता।
हमारे आचार्य भगवंत हमेशा कहते हैं कि जीवन एक छोटी सी नैया है, जिसे पार करने में माता और पिता ही हमारी मदद कर सकते हैं। याद करें वे क्षण जब हम छोटे थे। जब कभी बिस्तर में लघु या दीर्घ शंका कर लेते थे, मां हमें गीले स्थान से उठाकर सूखे स्थान पर सुला देती थीं और स्वयं उस गीले स्थान पर सोने को तैयार हो जाती थीं।
जब मां बन जाती है और प्रभु के दर्शन करने जाती है, तो वह अपने लिए कुछ नहीं मांगती; बस अपनी संतान के लिए मांगती है कि उसका जन्म निर्विघ्न हो जाए। जब बच्चा जन्म लेता है, तो मां हमेशा यही भावना करती है कि उसका बच्चा पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बने, उसे अच्छी लड़की मिले, और उसका परिवार खुशहाल हो। जब तक वह मां नहीं बनती, तब तक उसकी जिंदगी अपने हिसाब से चलती है।
लेकिन जिस दिन वह मां बन जाती है, उसका सब कुछ अपने बच्चे के लिए हो जाता है। जब बच्चा उसके गर्भ में पलता है, तो वह अपनी पसंद का खाना छोड़कर केवल वही चीजें खाती है, जो गर्भस्थ शिशु के लिए अच्छी होती हैं। यह वात्सल्य का प्रतीक है।
जब बच्चे का जन्म होता है, तो स्त्री अपने पुत्र को जन्म देती है। इससे बड़ा प्रेम और वात्सल्य हमारे जीवन में क्या हो सकता है? उसके स्तन से दूध स्वतः निकलने लगता है, बिना किसी दवाई या इंजेक्शन के। यह प्रेम और वात्सल्य का सबसे बड़ा उदाहरण है।”
इनका हुआ सम्मान
हवन में सूर्यकांत रजनी जैन रानीपुर वाले, कल्पना रुचि मोनू शुभ लाभ परिवार, टी.सी. जैन रानी जैन परिवार, अशोक सुनीता पलविया, प्रमोद शोभना जैन परिवार, पी.सी. सुषमा राहुल तृप्ति जैन परिवार, सोहनलाल मुकेश राकेश शैलेंद्र सरावगी परिवार, मोतीलाल ऋषभ कुमार संचित जैन परिवार, शकुंतला नितेश प्रिया जैन परिवार, सचिन शिवानी आर्शी इवांशी परिवार, विजय कुमार भरत आनंद कुमार अभिषेक कुमार जैन परिवार, मनीष शालिनी आदर्श मोनिका जैन परिवार, नीरज नेहा जैन परिवार, आरके जैन समता जैन शेंकी दिव्या जैन परिवार व अन्य समाजजन को बैठने का लाभ प्राप्त हुआ।
मुनि श्री की अष्ट द्रव्य से पूजन करने का लाभ सचिन शिवानी शौर्य जैन, ममता रत्नेश जैन, अशोक पालविया, सचिन ऋषभ जैन, अवी मुकेश जैन शुभ लाभ, मेघा अमित जैन, प्रशांत सरला पालविया, मीनाक्षी मनीष जैन प्रकृति, श्री पद्मप्रभु दिगंबर जैन वैभव नगर महिला मंडल को प्राप्त हुआ। अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज के गृहस्थ जीवन के माता-पिता, श्रीमती विमला और सोमचंद जैन का स्वागत समाज के सदस्य विनोद जैन, श्रीपाल जैन, पी. सी. जैन, डी. के. जैन (रिटायर्ड डीएसपी), रेखा संजय जैन, और कमलेश टीना जैन द्वारा किया गया।
समाज की ओर से धर्म प्रभावना समिति की महामंत्री रेखा जैन, स्वागताध्यक्ष डी. के. जैन और कोषाध्यक्ष कमलेश जैन का भी स्वागत किया गया। इस अवसर पर पंडित नितिन जैन और उनके संगीतकारों की टीम का भी समाज द्वारा स्वागत किया गया।














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