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उत्तम मार्दव धर्म पर दिए प्रवचन : मृदुता से ही मार्दव धर्म सार्थक – पं. अमित शास्त्री


 श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर, रानी बाग में जैन दर्शन के महत्वपूर्ण पर्व दशलक्षण महापर्व का मंगल आयोजन 8 से 17 सितम्बर तक भक्ति भाव सहित महती धर्मप्रभावना पूर्वक चल रहा है। जिनालय की मनोहारी सजावट व भव्यता सभी के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। प्रतिदिन प्रातः जिनाभिषेक, शांतिधारा व पूजन कर श्रद्धालुजन लाभान्वित हो रहे हैं। पढ़िए यह रिपोर्ट…


दिल्ली। श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर, रानी बाग में जैन दर्शन के महत्वपूर्ण पर्व दशलक्षण महापर्व का मंगल आयोजन 8 से 17 सितम्बर तक भक्ति भाव सहित महती धर्मप्रभावना पूर्वक चल रहा है। जिनालय की मनोहारी सजावट व भव्यता सभी के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। प्रतिदिन प्रातः जिनाभिषेक, शांतिधारा व पूजन कर श्रद्धालुजन लाभान्वित हो रहे हैं। सायंकालीन सत्र में मंगल आरती, शास्त्र प्रवचन व प्रेरक सांस्कृतिक कार्यक्रम में सम्मिलित होकर सभी धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। युवा विद्वान पं. अमित जैन शास्त्री जी ने उत्तम मार्दव धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्षमा के समान मार्दव भी आत्मा का स्वभाव है|

मान के मर्दन से ही मार्दव धर्म प्रकट होता है। अनादी से आत्मा में मान कषाय पर्याय ही प्रकट रूप से विद्यमान है। व्यक्ति आठ प्रकार के मदों से घिरा रहता है – धन, एश्वर्य, रूप, बल, ज्ञान, कुल, तप व जाति। इन्हीं मदों के कारण जीव की दुर्गति होती है। शास्त्री जी ने आगे कहा कि मृदुता अर्थात कोमलता का नाम मार्दव है| आचार्यों ने मान को महाविष के समान कहा है| जीवन के उत्थान के लिए हमें अहंकार छोड़कर मार्दव धर्म को अपनाना होगा|

विनम्रता अमृत के समान होती है, विनम्र व्यक्ति ही जीवन में सुखी रहता है। उल्लेखनीय है कि अनंत चतुर्दशी के पुनीत प्रसंग पर मूलनायक श्री शान्तिनाथ भगवान की मनोहारी प्रतिमा का स्वर्ण कलश द्वारा महामस्तकाभिषेक तथा श्री वासुपूज्य निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा। रविवार 22 सितम्बर को विशाल पालकी यात्रा नगर में निकाली जा रही है।

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