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धर्मसभा में दिए प्रवचन : गुरु के जाने के बाद हम दीक्षा दिवस नहीं गुरु दक्षिणा दिवस मनाएंगे – मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज


मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने अपने दीक्षा दिवस पर कहा कि गुरु के भावों को समझने की क्षमता जब शिष्य में पैदा हो जाती है तो उसे भाव दीक्षा कहते हैं। शब्दों में जीवन नहीं होता। शब्दों के पीछे भावों में जीवन होता है, इंसान में भावनात्मक शक्ति है। पढ़िए सतीश जैन की रिपोर्ट…


इंदौर। छत्रपति नगर के दलाल बाग में मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने अपने दीक्षा दिवस पर कहा कि आज नेमिनाथ भगवान का जन्म और तप कल्याण दिवस है। सन् 2004 में तिलवारा घाट पर हम 25 ब्रह्मचारी भाइयों की आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के कर कमलों से दीक्षा हुई थी। सन् 2000 में हम सभी का उन्होंने एक समूह बनाया और चार साल तक अथक प्रयास करके सभी को शिक्षित किया। उस समय हम अबोध थे, 2 मुट्ठी ज्ञान था और वही 2 मुट्ठी ज्ञान हमारे पास आज भी है, एक हाथ में गुरुदेव थे और दूसरे हाथ में भक्ति थी।

दीक्षा के बाद गुरुदेव के पास बैठे तो उन्होंने कहा कि आज आपकी द्रव्य दीक्षा हो गई ,अब साधु का रूप लेकर इस सृष्टि पर विचरण करोग , तभी लगा कि अभी और मायने में भी दीक्षा लेना बाकी है प्रथम बार में केशलोंच करने में मुझे 7 घंटे लगे , सिर में कई जगह से खून निकल आया था। तब आचार्य श्री ने अपने हाथों से घी लेकर सिर पर लगा दिया। उन्होंने कहा था कि केशलोंच और प्रतिक्रमण में किसी का हाथ नहीं लगवाना चाहिए। गुरुदेव कुछ बात कहें तो उसे गंभीरता से लेना चाहिए तब तीन चीज समझ में आई, द्रव्य दीक्षा, क्षेत्र दीक्षा,काल दीक्षा भी होती है। आचार्य श्री ने फिर भाव दीक्षा के बारे में समझाया।

गुरु के भावों को समझने की क्षमता जब शिष्य में पैदा हो जाती है तो उसे भाव दीक्षा कहते हैं। आपने कहा कि शब्दों में जीवन नहीं होता । शब्दों के पीछे भावों में जीवन होता है , इंसान में भावनात्मक शक्ति है। पहले दीक्षा दिवस पर हमारा सर झुक जाता था । गुरु के जाने के बाद अब हम दीक्षा- दिवस नहीं , गुरु – दक्षिणा दिवस मनाएंगे जो कि 18 फरवरी को आएगा। अब मुझे अपनी चिंता नहीं है। आचार्य श्री जी की इच्छा थी, संस्कृति के उत्थान की ,आत्मा के उत्थान की। उन्होंने कहा था प्रायश्चित करो, प्रतिक्रमण करो और इस संसार से बाहर निकल जाओ । यह भी समझाया था कि अकेले साधना नहीं होती, आचार्यों के साथ रहकर ही साधना होती है ।

दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के प्रचार प्रमुख सतीश जैन ने बताया कि आज प्रातः के सभी कार्यक्रम श्री आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में हुए। दोपहर में दलाल बाग में वीरोदय भारत:, प्रति भारत: कार्यक्रम के अंतर्गत सैनिकों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसके मुख्य अतिथि से परमवीर चक्र विजेता श्री योगेंद्र सिंह जी यादव। रात्रि में एक शाम भक्ति और देशभक्ति के नाम कार्यक्रम श्री निलेश जी बुरहार के द्वारा प्रस्तुत किया गया। 11 अगस्त को सुबह 8:30 बजे आचार्य श्री जी की पूजा के बाद प्रवचन होंगे। दोपहर में पुनः 1:00 बजे से सैनिक सम्मान समारोह का द्वितीय सत्र होगा।

इस अवसर पर मनोज बाकलीवाल, मनीष नायक, सतीश डबडेरा, विशाल जैन, शिल्पी जैन, विपुल बांझल, सतीश जैन, आनंद जैन, राकेश सिंघई, प्रदीप जैन(स्टील), आलोक बंडा, रितेश जैन, कैलाशचंद जैन नेताजी आदि विशेष रूप से मौजूद थे। पूज्य मुनि श्री निस्वार्थ सागर जी, मुनि श्री निसर्ग सागर जी एवं क्षुल्लक श्री हीरक सागर जी महाराज भी मंच पर विराजित थे। धर्म सभा का सफल संचालन भूपेंद्र जैन ने किया।

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