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धर्मसभा में दिए प्रवचन : मनुष्य पर्याय से ही मोक्ष प्राप्ति संभव- आचार्य वर्द्धमान सागर


 तीर्थंकर प्रभु के समवशरण में चारों गति के जीवों में से तीन गति के जीव क्रमशः देव, मनुष्य और तिर्यंच के जीव बारह कोठे की समवशरण सभा में उपस्थित होकर धर्मसभा में धर्मोपदेश श्रवण करते हैं। नरक गति के नारकी जीव इस सभा में उपस्थित नहीं हो सकते हैं। इन चारों गति के जीवों में से सिर्फ मनुष्य पर्याय के जीव ही संयम एवं व्रत धारण कर मोक्ष प्राप्ति का पुरुषार्थ कर सकते हैं। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


धरियावद। तीर्थंकर प्रभु के समवशरण में चारों गति के जीवों में से तीन गति के जीव क्रमशः देव, मनुष्य और तिर्यंच के जीव बारह कोठे की समवशरण सभा में उपस्थित होकर धर्मसभा में धर्मोपदेश श्रवण करते हैं। नरक गति के नारकी जीव इस सभा में उपस्थित नहीं हो सकते हैं। इन चारों गति के जीवों में से सिर्फ मनुष्य पर्याय के जीव ही संयम एवं व्रत धारण कर मोक्ष प्राप्ति का पुरुषार्थ कर सकते हैं। क्योंकि इसी पर्याय में मन, वाणी और सभी प्रकार की समर्थता होती है। उक्त विचार दिगंबर जैनाचार्य वर्द्धमान सागर जी महाराज ने शुक्रवार को सन्मति भवन (पारसोला) में आयोजित प्रातःकालीन धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

परिणाम बनाएं निर्मल

आचार्य वर्द्धमान सागर जी महाराज ने कहा कि मनुष्य पर्याय के जीवों को भी चार वर्णों में विभाजित किया गया है- क्षत्रिय, वैश्य, ब्राह्मण और शूद्र। इनमें से से भी तीन वर्ण के मनुष्य जैन धर्म को अपनाकर जिनेंद्र देव के बताए मार्ग पर चलकर पुरुषार्थ करके जैनेश्वरी दीक्षा धारण कर मोक्ष को प्राप्त कर सकते हैं। संसारी जीवों में मनुष्य पर्याय के जीव सद्गगृहस्थ धर्म का पालन करते हुए देव भक्ति और गुरु भक्ति करने का प्रमुख कर्तव्य पालन करने का नियम बताया गया है। आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य जन्म को प्राप्त करने के बाद देव, शास्त्र और गुरु की वाणी में सच्ची श्रद्धा एवं विश्वास रखते हुए मोक्ष प्राप्ति का पुरुषार्थ करना चाहिए। इसलिए सभी मनुष्य गति के जीवों को अपने परिणाम निर्मल बनाकर धर्म का पालन करना चाहिए।

मोक्ष सप्तमी मनाई जाएगी

आचार्य वर्द्धमान सागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य में श्रावण मास की शुक्ल सप्तमी को भगवान पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक पर्व मोक्ष सप्तमी के रूप में 11 अगस्त, रविवार को मनाया जाएगा। इसके बाद श्रावण शुक्ल पूर्णिमा 19 अगस्त सोमवार को वात्स्ल्य पर्व रक्षाबंधन मनाया जाएगा। श्रावण मास की समाप्ति के बाद शीघ्र ही आचार्य श्री के सिद्धहस्त कर कमलों से भव्य जैनेश्वरी दीक्षाएं प्रदान किया जाना संभावित है। उक्त सभी समारोहों में पारसोला वासियों के साथ ही आसपास और देश-प्रदेश के श्रावक-श्राविकाओं को धर्मलाभ प्राप्त कर पुण्य संचय करने का अवसर मिलेगा।

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