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धर्मसभा में दिए प्रवचन : वृक्ष, गाय, नदी और संत परोपकारी हैं – मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज


छत्रपति नगर के दलाल बाग में मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि जो लोग हमें स्क्रीन पर दिखते हैं, वो रियल लाइफ में हमसे नहीं मिलते। आपने कभी उनके साथ बैठकर आधे घंटे बाद नहीं की होगी , लेकिन मैंने तो की है ,जब वो आचार्य विद्यासागर जी महाराज के पास आते थे। तब मैंने उनसे पूछा कि आपने इतनी बड़ी सफलता कैसे पाई और सेलिब्रिटी बन गए। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


इंदौर। छत्रपति नगर के दलाल बाग में मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि जो लोग हमें स्क्रीन पर दिखते हैं, वो रियल लाइफ में हमसे नहीं मिलते। आपने कभी उनके साथ बैठकर आधे घंटे बाद नहीं की होगी , लेकिन मैंने तो की है ,जब वो आचार्य विद्यासागर जी महाराज के पास आते थे। तब मैंने उनसे पूछा कि आपने इतनी बड़ी सफलता कैसे पाई और सेलिब्रिटी बन गए। तब उन्होंने बताया कि इसके लिए हम तीन प्रबंधन करते हैं

पहला है – समय का संयमी बनकर।

दूसरा – ऊर्जा का संयमित प्रयोग करके और

तीसरा – मनोविज्ञान को समझे बिना हम एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाते।

उन्होंने कहा कि बड़े लोग कभी किसी को इंतजार नहीं कराते, उनके बड़े होने का एक मुख्य कारण यह भी है। हम हमेशा भोजन का संयम रखते हैं और मानसिक आहार का भी संयम रखते हैं। इसके लिए एक डाइटिशियन हमेशा साथ रखते हैं। वे कहते हैं कि जिसके जीवन में ईर्ष्या आई, उसके चेहरे पर झुर्रियां पढ़ने लग जाती है, चेहरा बिगड़ जाता है। संयम के साथ-साथ हमारी संवेदनाएं भी रहती है। संवेदनशीलता भी ऊपर उठाने का कार्य करती है। आध्यात्मिक शिक्षा भी हम लेते हैं। इसलिए हमारे पास कॉस्मेटिक से ज्यादा कॉन्फिडेंस की चमक रहती है। पुण्य और पुण्य के वैभव में बहुत अंतर है। हम चाहते हैं कि हमारी वाणी ,संवाद और वैभव किसी के काम आ जाए। चैरिटी की व्यवस्थाएं भी हम करते हैं। अपने लिए जीना भी क्या जीना। मुनिवर ने कहा कि यदि आपको भी बहुत ऊंचा उठना है , तो इन सब का प्रबंध करना होगा। मुनि श्री ने कहा कि वृक्ष , गाय, नदी और संत परोपकारी है। जहां भी रहते हैं या जहां भी जाते हैं परोपकार ही करते हैं। आप सब भी गुरुदेव की जीत में निमित्त बनिए । मैं बहुत गर्वित होता हूं कि मैं इस हेतु कार्य कर रहा हूं, और अंतिम पल तक गुरुदेव के प्रकल्पों के लिए काम करूंगा। जीवन में चरम पर पहुंचने के अपने-अपने तरीके हैं। आपकी सोच है कि संस्कृति का निर्माण हमने कर दिया तो आने वाली पीढ़ियों को भी उसका लाभ मिलता रहेगा। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के प्रचार प्रमुख सतीश जैन ने बताया कि आज प्रातः गुरुदेव के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन के बाद गुरुदेव की आठ द्रव्यों से सभी श्रावक- श्राविकाओं ने पूजन की। इस अवसर पर मनीष नायक,सतीश डबडेरा, विपुल बांझल, सतीश जैन, आनंद जैन, प्रदीप जैन( स्टील) , कमल अग्रवाल, आनंद जैन,आलोक बंडा, रितेश जैन, सुधीर जैन आदि विशेष रूप से मौजूद थे। पूज्य मुनि श्री निस्वार्थ सागर जी एवं क्षुल्लक श्री हीरक सागर जी महाराज भी मंच पर विराजित थे। मुनि संघ के प्रवचन प्रतिदिन प्रातः 6:00 बजे ,आचार्य भक्ति 7:00 बजे व शांति धारा मंदिर जी में होती है। तत्पश्चात सुबह 8.30 बजे से आचार्य श्री जी की पूजन, 9:00 बजे से प्रवचन, दलाल बाग में होते हैं,तत्पश्चात आहार चर्या होती है। जैन ने बताया कि 18 अगस्त को 8 वर्ष से बड़े और अविवाहित बच्चों के लिए उपनयन संस्कार सुबह 7:30 से 10:00 बजे तक होगा। उसके लिए 17 तारीख को बालकों को मुंडन कराना पड़ेगा, ताकि वे अपने पुण्य पाप का खाता शुरू कर सके। धर्म सभा का सफल संचालन भूपेंद्र जैन ने किया।

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