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भविष्य में सफलता का मार्ग खोलता है धर्म संस्कृति का ज्ञान  स्वास्थ्य, स्वच्छता, संस्कार, संस्कृति और सद्गुणों में बनें नंबर वन


जैन मंदिर में आयोजित संस्कार शिविर में बच्चों को संबोधित करते हुए कुमारी राजुल जैन ने कहा कि आज संस्कार प्रशिक्षण शिविर के जरिए जो ज्ञान आप सब अर्जित कर रहे हैं। वह ज्ञान आपके आने वाले जीवन में सफलता का मार्ग खोलेगा,इस ज्ञान के जरिए हम और आप सांसारिक सुखों से आगे जाकर मोक्ष मार्ग तक का रास्ता तय कर सकते है।पढि़ए अजय जैन की रिपोर्ट ……


अम्बाह। जैन मंदिर में आयोजित संस्कार शिविर में बच्चों को संबोधित करते हुए कुमारी राजुल जैन ने कहा कि आज संस्कार प्रशिक्षण शिविर के जरिए जो ज्ञान आप सब अर्जित कर रहे हैं। वह ज्ञान आपके आने वाले जीवन में सफलता का मार्ग खोलेगा,इस ज्ञान के जरिए हम और आप सांसारिक सुखों से आगे जाकर मोक्ष मार्ग तक का रास्ता तय कर सकते है।राजुल ने कहा कि हमारा एक ही सपना हो नंबर वन बनने का। हम केवल शिक्षा या समृद्धि से ही नंबर वन न बनें , वरन स्वास्थ्य, स्वच्छता, संस्कार, संस्कृति और सद्गुणों में भी नंबर वन बनें। तभी हमारे धर्म व देश की पहचान पूरे विश्व में विकसित से भी परम विकसित देश की बनेगी। उन्होंने कहा कि तकिए से कभी कील नहीं ठोकी जा सकती, कील ठोकने के लिए हमें हथोड़ा उठाना ही होगा ।वैसे ही अगर हमें 100% आगे बढ़ना है तो 100% ऊर्जा लगानी ही होगी।

अपनी लाइफ को बनाएं पॉजिटिव

आज का युग परिवर्तन का युग है, नई उम्मीद और नई ऊर्जा का युग है। हम अपनी चार दीवारी से बाहर निकलें। हमें जीवन में आगे बढ़ाने के लिए उड़ना चाहिए, उड़ नहीं सकें तो दौड़ना चाहिए, दौड़ नहीं सकें तो चलना चाहिए और चल नहीं सकें तो खिसकना चाहिए, पर कुछ न कुछ करते रहना चाहिए ।क्योंकि करने वालों को ही एक दिन कामयाबी मिला करती है। हम कभी भी अपने आप को बूढ़ा, कम और कमजोर न मानें। केवल एक दिन के लिए बूढ़े बनें जब मौत आने वाली हो।उन्होंने कहा कि अपनी लाइफ को पॉजिटिव बनाएं, पावरफुल बनाएं, पीसफुल बनाएं, और प्योरीफाइड बनाएं ।हमें अपनी कमजोरी को जीतना है। नकारात्मकता को कभी भी हावी नहीं होने देना है, हर समय पॉजिटिव रहना है, हर काम को मुस्कुराते हुए करना है, गुस्से को जीतना है, हेल्थ के लिए समय देना है और हर काम को ऊर्जावान बनकर और आनंद पूर्ण तरीके से करना है।राजुल जैन ने कहा कि हमें हर प्राणी से लेकर इंसानों तक सहयोग और सेवा करनी है क्योंकि पत्नी मकान तक काम आती है, समाज श्मशान तक काम आता है, पुत्र अग्नि दान तक काम आता है, पर अच्छे कर्म भगवान तक काम आते हैं।

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