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ग्रीष्मकालीन शिविर का उद्घाटन : जैन धर्म की शिक्षा युवा पीढ़ी के लिए अनिवार्य है- सरस जैन 


ग्रीष्म कालीन में शिविर में विनम्र एकेडमी का शुभारंभ परेड जैन ने आचार्य श्री विनम्र सागर के चित्र के आगे दीप जलाकर किया। वीतराग शासन बालिका मंडल द्वारा बच्चों को शिक्षाएं सिखाई जाएंगी। सरस जैन ने बताया कि जैन धर्म जो कि अनादिकाल से चलता रहा है, इसको और आगे बढ़ाने की जरूरत है। जैन धर्म की शिक्षा देना आज की युवा पीढ़ी और छोटे बच्चों को अनिवार्य हो गया है। पढ़िए सौरभ जैन की रिपोर्ट…


अम्बाह। ग्रीष्म कालीन में शिविर में विनम्र एकेडमी का शुभारंभ परेड जैन ने आचार्य श्री विनम्र सागर के चित्र के आगे दीप जलाकर किया। वीतराग शासन बालिका मंडल द्वारा बच्चों को शिक्षाएं सिखाई जाएंगी। सरस जैन ने बताया कि जैन धर्म जो कि अनादिकाल से चलता रहा है, इसको और आगे बढ़ाने की जरूरत है। जैन धर्म की शिक्षा देना आज की युवा पीढ़ी और छोटे बच्चों को अनिवार्य हो गया है। इससे उनमें त्याग, तपस्या और संस्कारी होने की भावना आती है।

उन्होंने कहा कि सही शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार हों तो जीवन का चहुंमुखी विकास संभव है। बालक का जन्म अच्छे संस्कारों से होता है। आवश्यकता है कि जीवन को संस्कारवान बनाया जाए क्योंकि जब तक जीवन संस्कारित नहीं होगा, तब तक वह समाज व राष्ट्र के लिए उपयोगी कैसे होगा? उन्होंने कहा कि आज का बालक कल का भारत है, राष्ट्र का भावी निर्माता है, बालक देश की धरोहर है, जिस प्रकार धन की रक्षा के लिए सुरक्षा के अच्छे इंतजाम किए जाते हैं

ठीक उसी प्रकार बालक के जीवन की सुरक्षा करना माता पिता का प्रथम कर्तव्य होता है। इसलिए धार्मिक संस्कार अपने बच्चों को देना जरूरी है। सभी अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें और उन्हें धर्म के प्रति वफादार बनाएं। नई पीढ़ी को सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूक करने बेहद जरूरी है।

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