दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बानपुर में 10वीं शताब्दी की मूर्तियां हैं। शांतिनाथ भगवान की 18 फीट ऊंची मूर्ति कुंथुनाथ और अरहनाथ की मूर्तियों से जुड़ी हुई है। ‘सहस्त्रकूट’ मंदिरों की वास्तुकला और नक्काशी देखने लायक है। ललितपुर जिले की महरौनी तहसील में प्राचीन जैन विरासत का भंडार है, लेकिन इसके संरक्षण और संवर्द्धन की आवश्यकता है। पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की विशेष रिपोर्ट…
ललितपुर। दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बानपुर में 10वीं शताब्दी की मूर्तियां हैं। शांतिनाथ भगवान की 18 फीट ऊंची मूर्ति कुंथुनाथ और अरहनाथ की मूर्तियों से जुड़ी हुई है। ‘सहस्त्रकूट’ मंदिरों की वास्तुकला और नक्काशी देखने लायक है। ललितपुर जिले की महरौनी तहसील में प्राचीन जैन विरासत का भंडार है, लेकिन इसके संरक्षण और संवर्द्धन की आवश्यकता है। तहसील क्षेत्र के बानपुर में बने प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर में 10वीं शताब्दी के पूर्व तक की मूर्तियां हैं। पाणाशाह द्वारा यहां पांच मंदिर बनवाए गए। इसमें मुख्य भगवान शांतिनाथ मंदिर में कई चमत्कार हुए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक हर साल भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा कुछ इंच बढ़ जाती है। इसके चलते कई बार मंदिर की मढ़िया टूट चुकी है।
बानपुर में बने मंदिरों में खजुराहो की शिल्प कला का खूब प्रयोग हुआ है। भगवान चंद्रप्रभु जिनालय के बाहर बनी कलाकृतियां खजुराहो शिल्प का उदाहरण हैं। इसके साथ ही सहस्रकूट चैत्यालय विश्वभर में अद्वितीय है। इसका निर्माण दसवीं शताब्दी में देवपाल ने कराया और वास्तुकला विशेषज्ञ पापट ने इसे निर्मित किया। चैत्यालय में नीचे से लेकर ऊपर शिखर तक चारों ओर मूर्तियां बनी हुई हैं। मूलनायक आदिनाथ भगवान से सुशोभित इस चैत्यालय को रेतीले पत्थर पर बनाया गया है। इसके अलावा क्षेत्र पर महावीर जिनालय, शांतिनाथ जिनालय, चंद्रप्रभु जिनालय बने हैं।













Add Comment