भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याण के अवसर पर आदिनाथ जिनालय में प्रात: श्री जी का अभिषेक किया गया। इसके बाद शान्ति धारा एवं भगवान का पूजन किया गया। फिर कुंडलपुर वाले बड़े बाबा का मंडल विधान किया गया एवं रात्री में भगवान की संगीतमय भक्ति व 48 दीपों से भक्तामर जी की आराधना सनावद की स्थानीय भजन मंडलियों द्वारा किया गया। पढि़ए पूरी रिपोर्ट…
सनावद। जैन धर्म के संस्थापक व प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का जन्म एवं तप कल्याणक मंगलवार को मनाया गया। सन्मति जैन काका ने बताया कि भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याण के अवसर पर आदिनाथ जिनालय में प्रात: श्री जी का अभिषेक किया गया। इसके बाद शान्ति धारा एवं भगवान का पूजन किया गया। फिर कुंडलपुर वाले बड़े बाबा का मंडल विधान किया गया एवं रात्री में भगवान की संगीतमय भक्ति व 48 दीपों से भक्तामर जी की आराधना सनावद की स्थानीय भजन मंडलियों द्वारा किया गया।
वहीं बड़े मंदिर जी में प्रात: आदिनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक किया गया। वहीं णमोकार धाम में भक्तों के द्वारा वृहद स्तर पर आदिनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक एवं पूजन किया गया। जैसे की सभी को ज्ञात है कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का जन्म चैत्र कृष्ण नौवीं के दिन सूर्योदय के समय हुआ। उन्हें ऋषभदेव जी, ऋषभनाथ भी कहा जाता है। ऋषभदेव आदिनाथ भगवान का जन्म युग के आदि में राजा नाभिराय जी के यहां पर माता मरूदेवी की कोख में हुआ था। वे जन्म से ही सम्पूर्ण शास्त्रों का ज्ञान थे।
वे समस्त कलाओं के ज्ञाता और सरस्वती के स्वामी थे। जैन पंथ में 24 तीर्थंकर हुए हैं, जिनमें सबसे पहले आदिनाथ भगवान हैं, ये राजा हुआ करते थे, लेकिन एक घटना के बाद इनका ह्रदय परिवर्तन हुआ और वैराग्य धारण कर इन्होंने जैन पंथ को अतिसार कर लिया। भगवान आदिनाथ ने विश्वशांति के लिए पूरा जीवन समर्पित कर दिया। इस अवसर पर सभी समाजजनों ने उपस्थित होकर अपनी उपस्थिति उर्ज करवाई।













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