इंदौर (राजेश जैन दद्दू) आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज ने धर्मसभा में कहा कि धर्म पर आस्था करेंगे तो एक रहेंगे, संप्रदाय पर आस्था करेंगे तो बट जाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर हमें धर्म बचाना है तो पंथवाद छोड़ना ही होगा, साधु किसी भी संघ या पंथ के हों सभी समान रूप से पूज्यनीय व वंदनीय हैं।
वे तो अपरिग्रही होकर हमेशा विहार करते हुए जगत कल्याणी जिनेंद्र की वाणी सुनाते हैं। इसलिए आज आवश्यकता इस बात की है कि जिस प्रकार हम 24 तीर्थंकरों को एकसमान मानते हैं, उसी प्रकार हमें वर्तमान में संतवाद, पंथवाद और संघवाद छोड़कर समान रूप से सभी संघों के अपरिग्रह महाव्रतधारी आचार्य, उपाध्याय और साधुओं से नाता जोड़ना चाहिए।
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