पूज्य गुरु मां श्री पूर्णमति माताजी ने डूंगरपुर की धरा से अपनी देशना प्रवचन के दौरान कहा कि गुरुदेव के संपूर्ण जीवन चरित्र और उनके व्यक्तित्व और कृतित्व से देश की युवा पीढ़ी प्रेरणा ले सके और अपने जीवन को भी संवार सके, इस पवित्र भावना के साथ देश के हर गांव -नगर में महामहिम आचार्य श्री विद्यासागर जी के जीवन दर्शन पर आधारित “विद्या गुरु मंदिरम” स्वप्रेरणा से बनना चाहिए। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट..
इंदौर। प्राणी मात्र के हृदय में विराजमान, महामहिम राष्ट्र संत, श्रमण कुल शिरोमणि, आचार्य देव श्री विद्यासागर जी महाराज का संपूर्ण जीवन जन-जन के लिए प्रेरणा का कार्य करेगा, गुरुदेव का संपूर्ण जीवन एक खुली किताब की तरह रहा है, जिसमें जैन संस्कृति के उन्नयन के साथ ही प्राणी मात्र जीव दया के कल्याण की भावना समाहित रही है। नियति के चलते पूज्य आचार्य भगवन का प्रत्यक्ष दिशा -निर्देशन तो अब हमें प्राप्त नहीं हो पाएगा, किंतु उनके प्रेरणादायी कार्य और उनके गहन चिंतन से बही अजश्र धारा हम सबके बीच पूज्य गुरुदेव को हमेशा जीवंत बनाए रखेगी। यह बात धर्मसभा में आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी ने कही।
विभिन्न क्षेत्रों से पधारे परम गुरु भक्तों ने पूज्य माताजी से निवेदन किया कि हमें ऐसा कोई प्रकल्प बताएं जिससे हम महामहिम आचार्य श्री जी की स्मृति को चिरस्मरणीय बना सकें और आने वाली भावी पीढ़ी भी उनके आदर्शों से परिचित रह सकें और जान सकें। इस पर पूज्य गुरु मां श्री पूर्णमति माताजी ने डूंगरपुर की धरा से अपनी देशना प्रवचन के दौरान कहा कि गुरुदेव के संपूर्ण जीवन चरित्र और उनके व्यक्तित्व और कृतित्व से देश की युवा पीढ़ी प्रेरणा ले सके और अपने जीवन को भी संवार सके, इस पवित्र भावना के साथ देश के हर गांव -नगर में महामहिम आचार्य श्री विद्यासागर जी के जीवन दर्शन पर आधारित “विद्या गुरु मंदिरम” स्वप्रेरणा से बनना चाहिए, जिससे आचार्य श्री जी की स्मृति भी चिरस्मरणीय बन सकेगी। धर्म सभा में उपस्थित समाज जन ने पूज्य माताजी के द्वारा व्यक्त की गई इस भावना पर तत्काल ही बागीदौरा जैन समाज डूंगरपुर, जैन समाज अहमदाबाद जैन समाज और समर्थ सोसायटी इंदौर के समाज जनों ने “विद्या गुरु मंदिरम” अपने नगर में बनाने का संकल्प व्यक्त कर दिया।













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