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सिद्धाचल पोदनपुरम में भगवान बाहुबली का प्रतिष्ठापना महोत्सव : बाहुबली भगवान को निर्वाण लाडू चढ़ा कर मोक्ष कल्याणक मनाया


नगर के गौरव परम पूज्य वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज के आशीर्वाद से 21 वर्ष पूर्व स्थापित दिगंबर जैन श्री क्षेत्र सिद्धाचल पोदनपुरम में भगवान बाहुबली का प्रतिष्ठापना महोत्सव एवं भगवान बाहुबली को निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। इसके अंतर्गत प्रातः सर्वप्रथम भगवान बाहुबली का पंचामृत चरणाभिषेक एवं तत्पश्चात भगवान बाहुबली का महापूजन किया गया। पढ़िए यह सन्मति जैन काका की रिपोर्ट…

 


सनावद। नगर के गौरव परम पूज्य वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज के आशीर्वाद से 21 वर्ष पूर्व स्थापित दिगंबर जैन श्री क्षेत्र सिद्धाचल पोदनपुरम में भगवान बाहुबली का प्रतिष्ठापना महोत्सव एवं भगवान बाहुबली को निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। इसके अंतर्गत प्रातः सर्वप्रथम भगवान बाहुबली का पंचामृत चरणाभिषेक एवं तत्पश्चात भगवान बाहुबली का महापूजन किया गया, जिसके अंतर्गत शान्ति धारा करने का सौभाग्य मुकेश जैन, शुभम, पेप्सी को प्राप्त हुआ। वहीं भगवान को मुख्य निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य शैलेंद्र कुमार जैन इंदौर परिवार को प्राप्त हुआ।

प्रशांत चौधरी ने बताया कि ऋषभदेव के दो पुत्र हुए, जिनका नाम भरत और बाहुबली था। भगवान बाहुबली को विष्णु का अवतार माना जाता था। वे अयोध्या के राजा थे और उनकी दो रानियां थीं। एक रानी से 99 पुत्र और एक पुत्री तथा दूसरी से गोम्मटेश्वर भगवान बाहुबली तथा एक पुत्री सुंदरी थी। बाहुबली का अपने ही भाई भरत से उनके शासन, सत्ता के लोभ तथा चक्रवर्ती बनने की इच्छा के कारण दृष्टि युद्ध, जल युद्ध और मल्ल युद्ध हुआ था। इसमें बाहुबली विजयी रहे, लेकिन उनका मन ग्लानि से भर गया और उन्होंने सब कुछ त्यागकर तप करने का निर्णय लिया। अत्यंत कठिन तपस्या के बाद वे मोक्षगामी बने। जैन धर्म में भगवान बाहुबली को पहला मोक्षगामी माना जाता है। भगवान बाहुबली ने इंसान के आध्यात्मिक उत्थान और मानसिक शांति के लिए चार बातें बताई थीं। अहिंसा से सुख, त्याग से शांति, मैत्री से प्रगति और ध्यान से सिद्धि मिलती है।

केवल यहीं चढ़ता है लाडू

वारिश जैन- संजय जैन एमपीईबी ने बताया कि सिद्धाचल पोदनपुरम की स्थापना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में आज से 21 वर्ष पूर्व भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा करवा कर की गई थी। संदीप जैन ने बताया कि बाहुबली भगवान का शास्त्रों में निर्वाण तिथि का कोई भी उल्लेख नहीं है। इसलिये पूरे भारत देश सिर्फ सिद्धाचल पोदनपुरम में प्रतिष्ठापना दिवस के दिन ही बाहुबली भगवान को यहां निर्वाण लाडू चढ़ाया जाता है।

ये भी रहे मौजूद

इस अवसर पर मनोज जैन, कुसुम काका, सुरेश मुंसी, सुनील जैन, अक्कू घाटे, हर्षील के के आशीष जैन, सोनू जैन, लवीश पाटनी, हर्षित जैन, संयम जटाले, पुलकित जैन, अभिजीत सराफ़, सुनील पावणा, स्वाति जैन, मंजू पाटनी, गरिमा पंचोलिया, मंजुला भूच, सावित्री जटाले, आरती जैन, निधि जैन, रानू जैन सहित सनावद मंडलेश्वर, बडवाह, इंदौर के सभी समाज्जन उपस्थित थे।

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