इंदौर। श्री दिगम्बर जैन नव ग्रह जिनालय ग्रेटर की पुण्य धरा पर चल रहे श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान के दूसरे दिन अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज ने कहा कि हम सब यहां बैठ कर पूज्यों की आराधना कर रहे हैं।

आचार्य भगवन कहते हैं कि मनुष्य रूप भव ही ऐसा भव है, जहां हम हमारे तन-मन-धन से हमारे भाव और भव, दोनों को सुधार सकते है। तप, त्याग, दान हमारे पाप कर्मों की निर्जरा करता है।

मन-वचन -काय से कर्म का बंधन होता है। उन्होंने कहा कि जब हम सरकारी नौकरी में जाते हैं, तब हमें कई प्रकार की ट्रेनिंग लेनी पड़ती है।

फिर हम भक्ति भाव, पूजन करने की ट्रेनिंग क्यूं नहीं लेते। आप विचार करना, क्या आप रावण से भी ज्यादा शक्तिशाली हैं।

जब उसका कर्म ही उसके विनाश का कारण बन गया, तब आपके कर्म आपके पुण्यों का उदय किस प्रकार करेंगे।

किसी को समझाने के बजाए स्वयं समझें तो आपको किसी को समझाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

आप देव-शास्त्र -गुरु की वाणी को सेव करें, बाकी सब डिलीट करें। आपका आयु कर्म आ जाए तो कोई नहीं बचा सकता, पुण्य ही आपको बचाता है।

गंधोदक लिया सिर-माथे
इसके पूर्व प्रातः काल की गुलाबी ठंड में मुनिश्री की मुखारविन्द से गजेन्द्र जैन एवं राजीव जैन, चक्रवर्ती परिवार व साथी चक्रवर्तियों के साथ इन्द्रों ने शांतिधारा कर श्रीजी के चरणों के गंधोदक को सिर -माथे लिया।

इसके साथ ही नगर पुरोहित पंडित नितिन झांझरी, पंडित विनोद पगारिया एवं पंडित कीर्तिश जैन के सानिध्य में संगीतमय वातावरण के हर्षोल्लास में नित्य नियम की पूजन के साथ श्री कल्पद्रुम विधान पूजन का लाभ लिया। इस अवसर पर मुनिश्री के पाद प्रक्षालन का लाभ तन्मय कासलीवाल, आयुष पाटनी को मिला।

शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य शैलेन्द्र कुमार, बाबूलाल जैन, मोडी वाले, सुभद्रा आनंद गोधा को प्राप्त हुआ।

दीप प्रज्वलन देवेन्द्र सोगानी, चन्द्रप्रकाश गोधा, ऋषभ पाटनी, दिलीप जैन आदि ने किया।

मंगलाचरण रितेश -पिंकी कासलीवाल, सौरभ- प्राची छाबड़ा, हर्ष-अन्नू पाटनी ने किया।

नववर्ष पर होंगे 100 से अधिक अर्घ्य अर्पित
इस अवसर पर समाज श्रेष्ठी हेमचंद झांझरी, अशोक काला, भरत मोदी, नकुल पाटोदी, सुभाष सामरिया, कैलाश लुहाडिया, प्रकाश छाबड़ा, मनोज पाटोदी एवं प्रयत्न ग्रुप के सभी साथियों ने मुनिश्री के चरणों में श्रीफल भेंट कर मंगल आशीर्वाद लिया।

शाम को श्रीजी व गुरुदेव की भक्तिभाव पूर्वक मंगल आरती, जिनभक्ति व गुरुभक्ति, भक्तामर दीपर्चना कर भक्तों ने अपने मानव जीवन को सार्थक कर पुण्य लाभ लिया।

आयोजन समिति के नरेन्द्र वैद व हितेश कासलीवाल ने बताया कि नववर्ष के पहले दिन श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान के तहत प्रातः काल मंगलाष्टक के बाद विधान मंडप में विराजित समस्त जिन प्रतिमाओं के अभिषेक एवं शांतिधारा चक्रवर्ती समूह द्वारा किये जाएंगे।

इसके बाद विनय पाठ, पूजा पीठिका, नव देवता पूजा के पश्चात ध्वजभूमि, कल्पभूमि एवं भवनभूमि पूजा के अंतर्गत इंद्र-इंद्राणियों के समूह द्वारा विधान मंडल पर अष्टद्रव्य, श्रीफल युक्त शताधिक अर्घ्य समर्पित किये जाएंगे
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