जैन श्रद्धालुओं के लिए आर्यिका प्रशांत मति माताजी की डायरी कुछ मंत्र दिए हैं, जिनसे लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। जानिए इन्हें ….
1. ऊं ह्रीं श्रीं ऐं वाग्वादिनी अर्हन् मुख-कमल-निवासिनी
भगवति ममास्ये प्रकाशं कुरु कुरु ह्रीं ऐं नमः । (108 बार जपें)
2. ऊं ह्रीं अरहंत देवाय नमः (स्वाहा)।
विधि – ब्रह्मचर्य व्रत पूर्वक धनतेरस को 40, चतुर्दशी को 42 और अमावस्या को 43 माला फेरना चाहिए। पश्चात प्रतिदिन एक-एक माला फेरना चाहिए। लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
3. ऊं ह्रीं श्रीं क्लीं ठैं । ऊं घण्टाकर्ण महावीर लक्ष्मी पूरय पूरय सुख-सौभाग्यं कुरु कुरु स्वाहा।
धनतेरस को 40, चतुर्दशी को 42 और अमावस्या को 43 माला लाल वस्त्र और लाल ही माला से फेरें।
4. ऊं आँ हाँ क्ष्वी ऊं ह्रीं नमः।
दीपावली या चन्द्र-सूर्य ग्रहण के दिन से प्रारम्भ कर 6 माह पर्यन्त प्रति दिन एक हजार जाप्य करने से, यह मन्त्र सिद्ध हो जाता है, पश्चात इसके प्रभाव से सर्व कार्य सिद्ध हो जाते हैं और सर्व प्राणी वश हो जाते हैं।
5. ऊं णमो सिद्धाणं पंचेणं।
दीपावली के दिन इस मंत्र का 108 बार जाप्य करने से कभी भय नहीं लगता।
6. ऊं ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्यै नमः।
विधि – ब्रह्मचर्य व्रत पूर्वक धनतेरस को 40, चतुर्दशी को 42 और अमावस्या को 43 माला फेरना चाहिए।














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