विजय नगर के दिगम्बर जैन पंचबालयति पारमार्थिक एवं धार्मिक ट्रस्ट की ओर से आयोजित पांच दिवसीय गुरु आराधना महोत्सव के चौथे दिन आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज की 78वीं जन्म जयंती, मुनिश्री समयसागरजी महाराज का 64वां जन्म महोत्सव एवं मुनि श्री प्रसादसागरजी आदि महाराज के दीक्षा दिवस के प्रसंग पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सान्निध्य अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागरजी महाराज एवं आशीर्वाद आचार्य श्री विहर्षसागरजी महाराज का रहा। अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागरजी महाराज ने प्रवचन में कहा कि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज ने धार्मिक, सामाजिक एवं परिवार के संस्कार और संस्कृति को बचाने के लिए अनेक अभियान शुरू किए, जो आज सफलता की ओर अग्रसर हैं। पढ़िए ये विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। विजय नगर के दिगम्बर जैन पंचबालयति पारमार्थिक एवं धार्मिक ट्रस्ट की ओर से आयोजित पांच दिवसीय गुरु आराधना महोत्सव के चौथे दिन आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज की 78वीं जन्म जयंती तथा मुनिश्री समयसागरजी महाराज का 64वां जन्म महोत्सव एवं मुनि श्री प्रसादसागरजी आदि महाराज के दीक्षा दिवस के प्रसंग पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सान्निध्य अंतमुखी मुनिश्री पूज्यसागरजी महाराज एवं आशीर्वाद आचार्य श्री विहर्षसागरजी महाराज का रहा। कार्यक्रम का प्रारम्भ मंगलाचरण, चित्रानावरण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके साथ ही सबसे पहले भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। इसके बाद आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का विशेष पूजन 8 संगठनों द्वारा किया गया। इसके साथ ही मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज को अर्घ्य समर्पित किए गए।
इन्हें मिला सौभाग्य
कार्यक्रम में मंगलाचरण करने का सौभाग्य सीमा जैन चित्र को प्राप्त हुआ। चित्र अनावरण पं. रतनलाल- चंचल जैन आगरा, डॉ. रजनी जैन, डॉ. अल्पना जैन, डॉ. समता जैन, डॉ. मुकेश जैन विमल, सुबोध मारौरा ने किया। दीप प्रज्वलन डॉ. अरविन्द जैन मंत्री पंचबालयति मंदिर, अनुराग जैन ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पं. रतनलाल शास्त्री ने की। मुख्य अतिथि चंचल जैन सी. ए. आगरा रहीं। कार्यक्रम का संचालन ब्र. जिनेश मलैया, विधि-विधान सुरेश मलैया द्वारा किया गया।
कई अभियान शुरू किए
इस अवसर पर अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागरजी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज ने धार्मिक, सामाजिक एवं परिवार के संस्कार और संस्कृति को बचाने के लिए अनेक अभियान शुरू किए और आज वे अभियान सफलता की ओर अग्रसर हैं। बच्चे के भीतर संस्कार और संस्कृति का बीजारोपण करने और उसे चरित्रवान बनाने के लिए प्रतिभास्थली की स्थापना कर युवाओं और बच्चों को धर्म से जोड़ने का कार्य किया। जैन धर्म के संस्कार, संस्कृति और इतिहास को सुरक्षित करने के लिए अनेक तीर्थों का जीर्णोद्धार एवं अनेक नये मंदिरों का निर्माण करने की प्रेरणा देते हुए समाज को सशक्त बनाने का काम किया। शरीर को निरोगी रखने के लिए पूर्णायु जैसी आयुर्वेदिक संस्था का निर्माण कर शुद्ध अहिंसक दवाइयों को घर-घर पहुंचाने का कार्य आचार्य श्री के आशीर्वाद से समाज द्वारा किया जा रहा है। व्यक्ति को स्वावलम्बी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए हथकरघा जैसे अभियान को सुदृढ़ बनाने के लिए आचार्य श्री के मार्गदर्शन में अनेक कार्य हो रहे हैं। आचार्य श्री हमारे बीच रहें या न रहें लेकिन उनका व्यक्तित्व व कृतित्व हमारे जीवन को उन्नति की ओर ले जाने का कार्य करता रहेगा। उन जैसे ने संत जिस प्रकार से हमें और हमारे समाज का मार्गदर्शन करके धर्म के साथ जोड़ने का कार्य किया है, वह अतुलनीय है। आचार्य श्री ने अनेक युवाओं को त्याग के मार्ग से जोड़कर 507 दीक्षाएं देकर उन्हें आत्म कल्याण के मार्ग पर पहुंचाया।
गुरु माता का मनाया अवतरण दिवस
ब्र. जिनेश मलैया ने बताया कि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज ने 131 मुनि, 172 आर्यिका, 60 ऐलक, 141 क्षुल्लक तथा 3 क्षुल्लिका दीक्षा दीं। शरद पूर्णिमा के दिन नेमावर में मुनिश्री अपूर्वसागर जी, प्रशांतसागरजी, निर्भीकतागरजी, विनीतसागरजी, निर्णयसागरजी, प्रबुद्धसागरजी, प्रवचनसागरजी पुण्यसागरजी, पायसागरजी, प्रसादसागरजी महाराज को मुनि दीक्षा दी थी। कार्यक्रम में मुनि श्री पूज्यसागरजी महाराज का गुरु माता आर्यिका ज्ञानमती माताजी का भी अवतरण दिवस मनाया गया।
बच्चों को दिया स्वर्णप्राशन
इसी अवसर पर प्रभा आयुर्वेदिक संस्थान द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। डॉ. संदीप प्रभा बजाज, डॉ. नीता बजाज डॉ. चैतन्य गुप्ता द्वारा निःशुल्क स्वर्णप्राशन बच्चों के लिए किया गया। विशाल नेत्र परीक्षण एवं चश्मा वितरण केन्द्र कासलीवाला काला फाउण्डेशन द्वारा तथा निःशुल्क मोतियाबिन्द शिविर रोहित आई हॉस्पिटल द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 300 लोगों ने लाभ लिया। रात्रि में विशाल गरबा प्रतियोगिता आयोजित की गई।













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