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चातुर्मास में धारण कर रहे हैं कई महाव्रत : जरूरत से ज्यादा पैसा जिंदगी का स्वाद बिगाड़ देता है – आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज


चातुर्मास में कई तरह की तपस्या करते हुए अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज का एक और महाव्रत धारण कर अपने जीवन को मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ा रहे है। इस बार 26 अक्टूबर से 40 दिन की मौन उपवास के साथ साधना में 5 आहार का वसंत व्रत संकल्प लेकर अपनी तपस्या को ओर प्रगाढ़ बना रहे हैं। पढ़िए राज कुमार अजमेरा की रिपोर्ट…


उदगांव। सम्मेद शिखर में पारसनाथ टोंक पर साधना करने वाले परम पूज्य प्रातः स्मरणीय अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज का मंगल विहार सन्मति सागर जी महाराज के समाधि स्थल उदगांव (महाराष्ट्र) की ओर हुआ था, जहां उन्होंने चातुर्मास की स्थापना की। इस चातुर्मास में कई तरह की तपस्या करते हुए अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज का एक और महाव्रत धारण कर अपने जीवन को मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ा रहे है। इस बार 26 अक्टूबर से 40 दिन की मौन उपवास के साथ साधना में 5 आहार का वसंत व्रत संकल्प लेकर अपनी तपस्या को ओर प्रगाढ़ बना रहे हैं। यह उपवास 4 दिसम्बर तक चलेगा और 4 दिसंबर को महापारणा उदगाव में होगी। इस अवसर पर अन्तर्मना ने कहा कि पैसा बोलता है।

अमूल्य सम्बन्धों की तुलना कभी पैसों से मत करो, क्योंकि पैसा दो दिन काम आयेगा परन्तु रिश्ते जिन्दगी भर साथ निभाएंगे। पैसा एक, नाम अनेक ,मंदिर में दिया जाए तो चढ़ावा, स्कूल में दिया जाए तो फीस, शादी में दो तो दहेज, तलाक देने पर गुजारा भत्ता, आप किसी को देते हो तो कर्ज, अदालत में दो तो जुर्माना, सरकार लेती है तो कर (टैक्स), सेवानिवृत्त होने पर पेंशन, अपहरण कर्ताओं के लिए फिरौती, होटल में सेवा के लिए टिप, बैंक से उधार लो तो ऋण, मजदूरों को दो तो वेतन,अवैध रूप से प्राप्त सेवा रिश्वत और मुझे दोगे तो गिफ्ट कहलाता है। पैसा नमक की तरह है जो जरूरी तो है मगर जरूरत से ज्यादा हो तो जिंदगी का स्वाद बिगाड़ देता है। पैसा मरने के बाद आप अपने साथ नहीं ले जा सकते लेकिन जीते जी पैसा आपको बहुत ऊपर ले जा सकता है। सिकन्दर से भी ज्यादा पैसा जोड़ो लेकिन जब छोड़ने का वक्त आये तो ऐसा छोड़ो जैसे-भगवान महावीर की तरह, तन पर एक धागा भी ना रहे। धन को अग्नि में डालो तो वह राख हो जाएगा और यदि धन को धर्म, मानव सेवा, परोपकार में लगाओ तो वह अक्षय खजाना बन जायेगा।

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