चातुर्मास के दौरान लग रहे भक्तामर प्रशिक्षण शिविर के 14वें काव्य को समझाते हुए मुनि श्री विनत सागर महाराज ने बताया कि जब हम उच्च गुणों वाले व्यक्तियों के पास बैठते हैं तो हमें उच्च गुणों की प्राप्ति होती है। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट…
बानपुर। चातुर्मास के दौरान लग रहे भक्तामर प्रशिक्षण शिविर के 14वें काव्य को समझाते हुए मुनि श्री विनत सागर महाराज ने बताया कि जब हम उच्च गुणों वाले व्यक्तियों के पास बैठते हैं तो हमें उच्च गुणों की प्राप्ति होती है। गुणात्मक व्यक्ति को ही दिखाई देते हैं। मुनिश्री ने कहा कि जो संतों की चार बातें सुन लेते हैं, उन्हें बाहर के लोगों की चार बातें नहीं सुननी पड़तीं।
जो पूज्य पुरुषों के पास बैठते हैं, उनका हर जगह सम्मान होता है। जो पूज्य पुरुषों के चरणों में अपना शीश नहीं झुका पाते, उनका शीश नारियल की खोपड़ी के समान है। मुनि श्री ने कहा कि भक्त हनुमान के जैसा होना चाहिए क्योंकि हनुमानजी ही एक ऐसे व्यक्ति हैं जो भगवान के बुरे वक्त में उनके काम में आए थे। हर भक्त भगवान से कुछ ना कुछ मांगता है लेकिन हनुमान जी ऐसे भक्त थे जो अपने भगवान के प्रति समर्पित थे तथा उनके दोनों चरणों को जिन्होंने अपने हृदय में धारण किया है।
इसीलिए श्री राम के चरणों में हमेशा हनुमान बैठते हैं। इस अवसर पर आचार्य श्री का पूजन एवं दोनों मुनिराजो का पाद प्रक्षालन हुआ। इसका पुण्यार्जन मां विशाश्री बालिका मंडल बानपुर को प्राप्त हुआ, जिसमें नैंसी जैन, अनि जैन, सेजल जैन, काजल जैन, सुहानी जैन, शिवि जैन एवं बड़ी संख्या में दिगंबर जैन समाज के पुरुष एवं महिलाएं उपस्थित रहे।













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