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माता पिता का थप्पड आर्शीवाद का काम करेगा: निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज


निर्यापक मुनिश्री सुधा सागर जी महाराज ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा गुरु को डांटने व माता पिता को थप्पड मारने का अधिकार दिया वो थप्पड ही आर्शीवाद का काम करेगा । पढ़िए शुभम जैन की यह विशेष रिपोर्ट श्रीफल जैन न्यूज़ के साथ…


आगरा | हरीपर्वत स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के आचार्य शांतिसागर सभागार में निर्यायक मुनिश्री सुधा सागर जी महाराज ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा की किसी को किसी के सहारे की जरूरत नहीं- लेकिन आज जगत में सब एक दूसरे के सहारे चल रहे हैं सहारा जगत में व्यक्ति मजबुरी में लेता है जब व्यक्ति असाहय हो जाता है सब तरफ से असमर्थ हो जाता है तब वह जगत में सहारा मांगने लगता है । जबकि सहारा लेना उसकी मजबूरी है बस अब ऐसा हो जाए कि मुझे संसार में किसी का सहारा ना लेना पड़े । तुम से कोई पूछे कि तुम्हारे लिए क्या चाहिए तो कहना कि मुझे कुछ नहीं चाहिए मुझे वो दशा मिल जाए की जगत में किसी भी चीज की कोई आवश्यकता ना रहे मैं अपने में ही रहूं ।

माता पिता के आशीवाद लाड प्यार से बर्बाद होता है बच्चा, शिष्य बर्बाद होता गुरु के लाड से । अतः आर्शीवाद मिलने कर बर्बादी हो रही हैं। गुरु को डांटने व माता पिता को थप्पड मारने का अधिकार दिया वो थप्पड ही आर्शीवाद का काम करेगा| गुरु के मुख से बुराई,पापी कहा हो तो कल्याण है ।

यदि तुमने किसी को लूटा, तुम्हें तो अच्छा लग रहा है परन्तु सामने वाले को दुःख हो रहा है कि खुशी हो रही है आप को यह भी पता करना चाहिए अन्यथा ये दुःख तुम्हारे पास लौटकर आयेगा । पापी बनना जितना कठिन है पुण्यात्मा बनना बहुत सरल है । जिन स्थानों पर आप एक घंटे नहीं रह सकते वह डाकूओं का पूरा जीवन निकल जाता है कितना कठिन है की उन्हें रात में भी भागना पड़ता है । जबकि व्रत में धर्म में संयम मार्ग में कोई कठिनाई नहीं है ।

आचार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज ने कहा कि संयम धारणा करने में कोई कठनाई नहीं है बहुत सरल है । हम लोगों को कोई चिंता नहीं है आराम से बैठे हैं तुम्हारे लिए पता चले कि डाकू तुम्हारे संबंध में विचार कर रहे थे तो बोलो तुम्हारी क्या दसा होगी वहीं आपको पता चले कि महाराज जी मेरा नाम ले रहे थे मेरे संबध में विचार कर रहे थे । यदि आपको पता चले तो आप नाच उठगे कि महाराज जी मेरे संबध में विचार कर रहे थे मैं धन्य हो गया अब मेरा कुछ अच्छा होने वाला है मेरे लिए कुछ कह रहे थे मैं धन्य हो गया महाराज जी के मुख पर मेरा नाम आया है ।

जगत में कुछ नया हैं ही नहीं-पेड़ ने कर दिया ऐलान पूराने पत्तों को जाना होगा नये पत्तों को स्थान देना है । वे पुराने पत्ते वहीं सड़कर उसी स्थान पेड़ को खाद का काम करता है । परिवर्तन संसार का नियम है । एक बुजूर्ग व्यक्ति मर रहा था लोग कहते हैं कि चलो बुजूर्ग से आशीर्वाद लें आयें वहीं जीव उसी नगर के राजा के यहां जन्मा तो उसे आशीर्वाद देने निकल पड़े । नया कुछ भी नहीं है पर्याय का परिवर्तन है नया कुछ है ही नहीं ।

नये पुराने में आंनद नहीं है आंनद तो उस महा सत्ता है । दुनिया में कुछ नया हैं ही नहीं है बालक और बुड़े के बीच में जो है उसे समझ लेना जैन दर्शन में रोना भी कषाय है हंसना भी कषाय है। हंसने में आंनद मनाने वाले रोने को तैयार रहें। इंसान संसार की ठोकरे खाते खोते इतना भयभीत हो गया है कि वह यह चाह रहा है कि प्रकृति व सभी जीव मेरी सहायता करे,मेरी लिए काम आये,मेरे संकट दूर करे ये कारण हमारी बर्बादी का । हमारे लिए 10 लोग हमेशा खडे रहे भगवान गुरु की सहारा शरण मे आता है सही है लेकिन सहारा लेना सही नहीं है।

धर्मसभा का शुभारम्भ राहुल विहार जैन महिला मंडल द्वारा सुंदर भक्ति गीत पर मंगलाचरण की प्रस्तुति के साथ किया। श्री दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति,आगरा दिगम्बर जैन परिषद एवं श्री दिगंबर जैन शिक्षा समिति द्वारा एवं बाहर से पधारे गुरुभक्तों ने भी मुनिश्री के समक्ष श्रीफल भेंटकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया| मुनिश्री का पाद प्रक्षालन सौभाग्यशाली भक्तों ने किया| इस अवसर पर धर्मसभा में मुख्य रूप से निर्मल जैन मोठ्या मनोज जैन बाकलीवाल,नीरज जैन जिनवाणी, पन्नालाल बैनाड़ा,हीरालाल बैनाड़ा, जगदीश प्रसाद जैन,राकेश सेठी, जगदीश प्रसाद जैन,शिखरचंद जैन सिंघई,अमित जैन बॉबी,मीडिया प्रभारी शुभम जैन,आशीष जैन मोनू, नरेश जैन लुहारिया,अनिल जैन रईस, राहुल जैन,समस्त आगरा सकल जैन समाज के लोग बडी़ संख्या में उपस्थित रहे।

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Shreephal Jain News

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