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प्रवचन के माध्यम से बताया आहारदान का महत्व : बरसात, हवा, कर्म और साधु कब आ जाए, पता नहीं – मुनिश्री सुधासागर


जब आप मकान बनवाते हैं तो उसमें विभिन्न विषयक अलग-अलग कमरे बनवाते हैं लेकिन आप साधुओं के लिए आहारशाला या स्वाध्याय के लिए अलग से कमरा नहीं बनवाते। दिगम्बर साधु के पड़गाहन मात्र से भारी पुण्य का आश्रव होता है। ये विचार मुनिपुंगव सुधासागर जी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…


आगरा। जब आप मकान बनवाते हैं तो उसमें विभिन्न विषयक अलग-अलग कमरे बनवाते हैं लेकिन आप साधुओं के लिए आहारशाला या स्वाध्याय के लिए अलग से कमरा नहीं बनवाते। दिगम्बर साधु के पड़गाहन मात्र से भारी पुण्य का आश्रव होता है। ये विचार श्री महावीर दिगम्बर जैन इन्टर कॉलेज, हरीपर्वत परिसर आगरा में वर्षायोगरत निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव सुधासागर जी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

चौका लगाने का बताया महत्व

पूज्य मुनिपुंगव श्रमण सुधासागर महाराज ने आहार दान के महत्व के संदर्भ में कहा कि मुनिराज को नमोस्तु तो हर चलता फिरता करता है, परन्तु असली नमोस्तु तो वह है जो नवधाभक्ति के समय पडगाहन करते हुए होता है। उन्होंने चौका लगाने का महत्व बताते हुये कहा कि चौका लगाकर, मात्र पडगाहन पर खडे़ होने से ही 75% अंक श्रावक के खाते में आ जाते हैं, चाहे मुनिराज आएं या नहीं आएं। उन्होंने बताया कि बिना नवधा भक्ति किए जो लोग चौकों में आकर हथेली पर ग्रास रखना चाहते हैं, उन्हे मात्र 25% अंक समान ही पुण्य मिलता है।

धर्मशाला बनवाएं

उन्होंने हर श्रावक और हर मन्दिर से आह्वान किया कि अगर घर बना रहे हैं, तो एक कक्ष साधु के आहार देने योग्य बनाएं और अगर मन्दिर बना रहे हैं तो साथ में साधु के लिये सन्तशाला और साधु के साथ आने वाले भक्तों के लिए धर्मशाला तो अवश्य बनानी चाहिए। साधु आए या न आए परन्तु हमें अपने घर और मन्दिर में व्यवस्थायें हमेशा तैयार रखनी चाहिए क्योंकि बरसात का, हवा का, कर्म का और साधु के आने का कभी भी पता नहीं चलता।

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