धर्मसभा में आचार्य श्री विहसंत सागर महाराज ने कहा कि देह को कृष करने वाले धर्म बहुत जन करते हैं, लेकिन तत्व का निर्णय करके तप करना वास्तविक तपस्या है। जिसने तन की तपस्या की है, वह तमाशा बन जाती है और जिसने तन की तपस्या के साथ मन की तपस्या की है, वह तीर्थ बन जाती है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
डबरा। चातुर्मासिक धर्मसभा में आरोग्यमय वर्षायोग समिति द्वारा आचार्य विराग सागर जी मुनिराज का चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन कियागया। इसके बाद भक्ति भाव से मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री 108 विहसंतसागर जी महाराज की सभी भक्तों ने अष्ट द्रव्य से पूजा अर्चना की। गुरुदेव ने भक्तामर की कक्षा में ग्यारहवें काव्य में बताया कि हे जिनवर, अपलक देखने योग्य आपका रूप देखकर तो संतोष प्राप्त होता है, वह अन्य देवों को देखकर नहीं होता। क्या क्षीरसागर का कांतिमय मिष्ट जल पीने वाला क्षारीय जल पीना चाहेगा? नहीं चाहेगा। दोपहर कालीन स्वाध्याय में मुनिवर ने तपस्या की महिमा के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक आमनाय में तपस्या का वर्णन है। कोई उपवास करना, पहाड़ों पर जाकर तप करना ये सब तपस्या मानता है। लेकिन आचार्य भगवंत कह रहे हैं कि देह को कृष करने वाले धर्म बहुत जन करते हैं, लेकिन तत्व का निर्णय करके तप करना वास्तविक तपस्या है। जिसने तन की तपस्या की है, वह तमाशा बन जाती है और जिसने तन की तपस्या के साथ मन की तपस्या की है, वह तीर्थ बन जाती है। बिना तपस्या के मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो सकती, तपस्या ऐसी करना जिससे कर्म नाश हो जाए, तपस्या ऐसी नहीं करना जिससे शुभोपयोग नष्ट हो जाए। भिंड, ग्वालियर, भोपाल से पधारे गुरु भक्तों ने गुरुदेव को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
आरोग्यमय वर्षा योग समिति द्वारा उनका सम्मान मोमेंटो और चंदन से किया गया। आरोग्यमय वर्षा योग समिति के अध्यक्ष विनोद जैन, महामंत्री नरेंद्र जैन नीरू, कोषाध्यक्ष कोमल चंद जैन, नीलेश जैन डायमंड, काली जैन, राजू जैन कपड़े वाले ने बताया कि राष्ट्रहित में नारी का योगदान का कार्यक्रम शनिवार को दोपहर 12:00 बजे से 4:00 बजे तक रखा गया है, जिसमें सभी जगह से महिलाएं अधिक से अधिक संख्या में भाग लेंगी।













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