वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी के सानिध्य में प्रातः जिनसहस्त्रनाम धारा एवं पारिवारिक पूजन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। पूज्य माता जी ने सभी परिवारों को समझाते हुये कहा कि परिवार एक ऐसा स्थान है, जब चारों ओर से आक्रमण हो, फिर भी हम जहां सुरक्षित हैं, वह परिवार है। पढ़िए राकेश कासलीवाल की रिपोर्ट…
रांची। वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी के सानिध्य में प्रातः जिनसहस्त्रनाम धारा एवं पारिवारिक पूजन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। पूज्य माता जी ने सभी परिवारों को समझाते हुये कहा कि परिवार एक ऐसा स्थान है, जब चारों ओर से आक्रमण हो, फिर भी हम जहां सुरक्षित हैं, वह परिवार है। नारकियों का, देवों का कोई परिवार नहीं होता है। केवल कर्म भूमियों के मनुष्यों का ही परिवार होता है। पहले हम अपने आप को बहुत महंगा बना लेते हैं फिर हम महंगाई के लिए रोते रहते हैं। पहले एक जमाना था, जब एक माता – पिता के 8-8, 10 -10 संतानें हुआ करती थीं।
अब तो जमाना आ गया , हम दो हमारे दो। जिस परिवार में बच्चों को दादा – दादी, चाचा – चाची आदि का प्रेम मिले, उस परिवार में सदैव ही सुख शांतिपूर्वक जीवन होता। माता-पिता के विरासत से मिले हुए अनुशासन से परिवार में हमेशा ही प्रेम बना रहता है और इससे बढ़कर कोई संपत्ति नहीं है। प्रेम से ही सहयोग की भावना बनती है। परिवार में माताओं का एक लक्ष्य होना चाहिए कि परिवार में शांति रहे, यदि परिवार में शांति रहेगी तो आपस में प्रेम बढ़ेगा। इस संसार में सर्वदा से सुख किसी को नहीं मिला। कोई तन दुखी, कोई मन दुखी, कोई धन दुखी दिखता है।

पैर छूना सिखाएं
हमारी प्राचीन भारतीय परम्परा रही है कि प्रातःकाल उठते ही बच्चे माता – पिता और गुरु के चरण स्पर्श करते थे। चरण स्पर्श की परम्परा आचरण स्पर्श की परम्परा है। यदि आपकी संतान आपके चरण स्पर्श करती है तो निश्चित ही वह आपके आचरण को भी स्पर्श करेंगे और आपके पदचिह्नों पर चलने की कोशिश करेगी। यदि बहु अपने सास – ससुर के चरण स्पर्श करती रहेगी तो कभी भी सास – बहू की आपस में लड़ाई नहीं होगी। कोई किसी को कुछ नहीं दे सकता। सभी को अपने अपने कर्मों का फल भोगना पड़ेगा।
आचार्य श्री की हत्या की निंदा की
सभा के अन्त में आर्यिका विभाश्री माताजी ने कहा कि कर्नाटक में दिगंबर जैन संत पूज्य आचार्य श्री कामकुमार नंदी जी महाराज की अपहरण एवं बर्बरता पूर्वक हत्या पर घोर क्षोभ प्रकट करते हुए निन्दा की। उन्होंने कहा कि अपराधियों पर कठोर कार्यवाही होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी ऐसा करने का दुःसाहस नहीं कर सके। कर्नाटक में सरकार के कुशासन में अब जैन संत भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने संपूर्ण जैन समाज से अपील की है कि पूरे समाज को संगठित होकर केंद्र एवं राज्य सरकार के समक्ष इस घटना का विरोध करना चाहिए ताकि अपराधियों को उचित सजा मिल सके एवं भविष्य में कोई ऐसा अपराध करने की हिम्मत न कर सके।













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