अगर संसारी माताएं भी पूरी मां बनना चाहती हैं तो वह अपने बच्चों के केवल शरीर का ही पालन पोषण न करें बल्कि उनकी आत्मा को भी संस्कार प्रदान करें, अपने बच्चों को प्रभु और गुरुओं से जोड़ने में सेतू बनें। जिससे मां और बच्चे सभी का कल्याण संभव हो सके। उक्त विचार गुरु पूर्णिमा महोत्सव के पावन पर्व पर आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी महाराज ऋषभ सत्संग भवन चैत्यालय मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुये व्यक्त किए। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…
भिण्ड। गुरु पूर्णिमा के दिन अपने गुरु की भक्ति की जाती है और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। वेद शास्त्रों में भी यही बताया गया है लेकिन यदि गुरु पूर्णिमा को शब्द रूप में देखें तो बहुत ही गहरा अर्थ प्राप्त होता है। गुरु पूर्णिमा यानि गुरु ही पूरी मां हैं क्योंकि जो संसारी मां होती है, वह अपने बच्चों का केवल शरीर का पालन पोषण करती है, पर गुरु अपने शिष्यों के शरीर और आत्मा दोनों का ही पालन पोषण करते हैं। इसीलिए गुरु ही पूरी मां हैं, बाकी संसारी महिलाएं अधूरी मां हैं। अगर संसारी माताएं भी पूरी मां बनना चाहती हैं तो वह अपने बच्चों के केवल शरीर का ही पालन पोषण न करें बल्कि उनकी आत्मा को भी संस्कार प्रदान करें, अपने बच्चों को प्रभु और गुरुओं से जोड़ने में सेतू बनें। जिससे मां और बच्चे सभी का कल्याण संभव हो सके। उक्त विचार गुरु पूर्णिमा महोत्सव के पावन पर्व पर आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी महाराज ऋषभ सत्संग भवन चैत्यालय मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुये व्यक्त किए।

पाद प्रक्षालन कर किया आशीर्वाद ग्रहण
गुरुदेव आचार्य श्री विनिश्चयसागर महाराज के परम भक्त मुरैना निवासी ब्रजेश जैन दादा ने बताया कि परम पूज्य गणाचार्य श्री विरागसागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य आचार्य श्री विनिश्चयसागर महाराज ससंघ का पावन वर्षायोग- 2023 श्री दिगम्बर जैन मंदिर बताशा बाजार भिण्ड में होने जा रहा है। पूज्य गुरुदेव का वर्षायोग हेतु भव्य मंगल आगमन 23 जून को भिण्ड नगर में हो चुका है। 2023 के पावन वर्षायोग हेतु मंगल कलश स्थापना समारोह रविवार 9 जुलाई को भव्यता पूर्वक स्थापित किया जाएगा। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर गुरुदेव विनिश्चयसागर के भक्तों ने पूज्य गुरुदेव का पाद प्रक्षालन कर शुभाशीष ग्रहण किया। ज्ञान दान के रूप में गुरु विवेककुमार मनोजकुमार जैन (चैटा वाले) मुरैना ने पूज्यश्री के कर में जिनवाणी भेंट कर, चरण वंदना करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया। इस पुनीत अवसर पर सम्पूर्ण भारतवर्ष से हजारों की संख्या में गुरुभक्त सधर्मी बंधु उपस्थित थे।













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