आर्यिका विकाम्यामति माताजी का मंगल प्रवेश बीते मंगलवार को आजाद चौक के समीप स्थित श्री वासुपूज्य दशा नरसिंहपुरा जैन मंदिर में हुआ। इस अवसर पर दशा नरसिंहपुरा दिगंबर जैन समाज के पदाधिकारियों और समाजजनों ने आर्यिका संघ की भव्य अगवानी की। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
बांसवाड़ा। आर्यिका विकाम्यामति माताजी का मंगल प्रवेश बीते मंगलवार को आजाद चौक के समीप स्थित श्री वासुपूज्य दशा नरसिंहपुरा जैन मंदिर में हुआ। इस अवसर पर दशा नरसिंहपुरा दिगंबर जैन समाज के पदाधिकारियों और समाजजनों ने आर्यिका संघ की भव्य अगवानी की। इस दौरान दशा नरसिंहपुरा दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष बदामी लाल वोरा, महामंत्री मनोज सिंघवी, उपाध्यक्ष लक्ष्मी लाल नायक समेत समाज के कई गणमान्य महानुभाव उपस्थित रहे। वहीं बाद में आर्यिका संघ के पाद प्रक्षालन के साथ ही मंदिर में अभिषेक, पूजन किए गए। इसके साथ ही प्रथम स्वर्ण कलश अभिषेक करने के पुण्यार्जक वोरा राजेन्द्र जोधराज परिवार माही डैम वाले रहे। 108 स्वर्ण कलश और स्वर्ण कलश शांतिधारा के पुण्यार्जक गुप्त परिवार रहे। इस बीच खांदू कॉलोनी से आए जैन समाज के पदाधिकारियों ने आर्यिका संघ को नारियल भेंट कर आमंत्रण दिया और स्वैच्छिक शांतिधारा के पुण्यार्जक बने समाज द्वारा खांदू कॉलोनी जैन समाज के पदाधिकारियों का स्वागत और अभिनंदन किया गया।
हुआ वासुपूज्य विधान
जिनालय में आर्यिका ससंघ के सानिध्य में वासुपूज्य विधान हुआ। इसमें सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य अशोक मालवीय रेवाचंद परिवार को प्राप्त हुआ। स्वर्ण पात्र पूजन का लाभ वोरा बदामी लाल हिराकंचन परिवार को मिला। समाज के प्रवक्ता शैलेन्द्र वोरा ने बताया कि आर्यिका विकाम्यामति माताजी द्वारा प्रवचन दिए गए, जिसमें उन्होंने जैन धर्म के सिद्धांतों और जैन धर्म का एक ही मार्ग मोक्ष मार्ग तक जाना किस प्रकार संभव है, के बारे में बताया। विधान आदि कार्य पंडित नीरज जैन के नेतृत्व में सम्पन्न हुए।













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