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दस साल से नहीं है कोई जैन परिवार :  हुसैनपुर में समाप्त हो गया 500 साल पुराने जैन मंदिर का इतिहास


हुसैनपुर कलां गांव में परिस्थितियों वश इंसान ही नहीं, भगवान को भी अपना स्थान छोड़ने के लिए बाध्य होना पड़ रहा। आबादी का संतुलन ऐसा बिगड़ा कि पहले जैन समुदाय के लोग छोड़कर चले गए। अब जैन मंदिर से भगवान चंद्रप्रभु जिनालय समवशरण मूर्तियों को बुढ़ाना के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में स्थापित किया गया है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


मुजफ्फरनगर। जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर हुसैनपुर कलां गांव में परिस्थितियों वश इंसान ही नहीं, भगवान को भी अपना स्थान छोड़ने के लिए बाध्य होना पड़ रहा। आबादी का संतुलन ऐसा बिगड़ा कि पहले जैन समुदाय के लोग छोड़कर चले गए। अब जैन मंदिर से भगवान चंद्रप्रभु जिनालय समवशरण मूर्तियों को बुढ़ाना के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में स्थापित किया गया है। दरअसल इलाके में लगभग दस साल से कोई जैन परिवार नहीं है। एक पुजारी पूजा व मंदिर की देखरेख करते हैं। ऐसे में मूर्तियों को बुढ़ाना स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में स्थापित करने के लिए मंदिर में नूतन भव्य वेदी का निर्माण किया गया है। पूजा अर्चना शुरू कर दी गयी है। बीते 25 मई को गांव हुसैनपुर से मूर्तियों को बैंडबाजों के साथ बुढ़ाना लाकर विधि-विधान से स्थापित किया गया है।

कभी रहे थे आर्थिक ताकत

साहूकारी व व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र में होने के कारण जैन समाज के लोग क्षेत्र की आर्थिक ताकत रहे हैं। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि पांच सौ साल पहले यहां मंदिर बनाया गया था। गांव में पिछले पांच दशक में बदलाव आया। गांव हुसैनपुर कलां के जैन मंदिर में 500 वर्ष पूर्व स्थापित भगवान की मूर्तियों को लेकर भी अब सवाल खड़े हो गए हैं। कभी जैन साधुओं के विहार व जिनवाणी से गूंजने वाले हुसैनपुर में ऐसा भी समय आया जब गांव में जैन समाज का एक भी परिवार नहीं रहा।

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