पर्वतारोही याशी ने ईश्वर की कृपा और आपकी प्रार्थनाओं से रायगढ और छत्तीसगढ का मान देश-प्रदेश में और दुनिया में बढ़ाया है और वह देश की सबसे कम उम्र की बेटी बन गई हैं, जिन्होंने मात्र 26 घंटे में माऊंट एवरेस्ट और माऊंट लाउत्से को फतह कर तिरंगा फहराया है। पढ़िए याशी के रायगढ़ पहुंचने पर राजेश जैन दद्दू की विशेष रिपोर्ट…
रायगढ़। पर्वतारोही याशी जैन अब किसी पहचान की मोहताज नहीं है। याशी ने इतनी कम उम्र में ही वो कारनामा कर दिखाया है, जिसने हर माता-पिता का नजरिया अपनी बेटियों के प्रति बदल दिया है। पर्वतारोही याशी ने ईश्वर की कृपा और आपकी प्रार्थनाओं से रायगढ और छत्तीसगढ का मान देश-प्रदेश में और दुनिया में बढ़ाया है और वह देश की सबसे कम उम्र की बेटी बन गई हैं, जिन्होंने मात्र 26 घंटे में माऊंट एवरेस्ट और माऊंट लाउत्से को फतह कर तिरंगा फहराया है। आज हर माता-पिता की चाहत है कि उनकी बेटी हो और वह याशी जैसा परचम बुलन्द करे।
एक अप्रैल से शुरू हुई थी यात्र
ज्ञातव्य है कि याशी की माऊंट एवरेस्ट यात्रा रायगढ से 1 अप्रैल को शुरू हुई थी और 17 मई को सुबह 5:45 पर एवरेस्ट पर फिर लगभग 26 घंटे बाद ही उन्होंने माऊंट लाउत्से फतह कर लिया था और यह सफलता पाने वाली वह भारत की सबसे कम उम्र की बेटी बन गई हैं।
सीध गईं जैन मंदिर
रायगढ का ऐसा नाम रोशन करने वाली याशी बुधवार लगभग शाम 5 बजे रायगढ पहुंचीं। जहां उन्होंने सीधे दिगम्बर जैन मंदिर पहुंच कर ईश्वर का धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके बाद उन्होंने गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। याशी जैन के पारिवारिक मित्र ऋषि वर्मा (वर्मा वाँच ) ने बताया कि याशी शाम 5 बजे रोड रायगढ पहुंच कर सीधे दिगम्बर जैन मंदिर पहुंचीं। जहां रायगढ के गणमान्य नागरिकों ने याशी का अभिनन्दन किया। साथ ही जैन समाज के युवा मंडल के मंत्री अनल नुक्की जैन ने बताया कि याशी पूरे विश्व में सकल जैन समाज की पहली बेटी हैं, जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल कर पूरे जैन समाज का गौरव बढ़ाया है।
निकाली गई रैली
इंदौर दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी, मंत्री डॉ. जैनेन्द्र जैन, हंसमुख गांधी, टीके वेद, विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन एवं प्रचार प्रमुख राजेश जैन दद्दू, परवार समाज महिला संगठन की अध्यक्ष मुक्ता जैन, सचिव सारिका जैन ने बेटी के इस सहासिक कार्य की प्रशंसा की और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। बुधवार शाम अभिनन्दन के पश्चात पूरे जोश-उत्साह से एक बड़ी रैली के रूप में समस्त गणमान्य लोग याशी को उनके घर तक छोड़ने गए।













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