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तृतीय आचार्य पदारोहण दिवस पर विशेष : छाणी परंपरा के सप्तम पट्टाचार्य हैं ज्ञेयसागर महाराज


उत्तर भारत के प्रथम दिगम्बराचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज (छाणी) परम्परा के चतुर्थ पट्टाचार्य मसोपवासी, चारित्र चक्रवर्ती, समाधि सम्राट आचार्य श्री सुमतिसागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती परम प्रभावक शिष्य सराकोद्धारक, नवचेतना प्रदायक षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज द्वारा दीक्षित मुनिश्री ज्ञेयसागर जी महाराज का गृहस्थ अवस्था का नाम अनिल जैन था। पढ़िए मनोज नायक का यह विशेष आलेख


मुरैना। उत्तर भारत के प्रथम दिगम्बराचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज (छाणी) परम्परा के चतुर्थ पट्टाचार्य मसोपवासी, चारित्र चक्रवर्ती, समाधि सम्राट आचार्य श्री सुमतिसागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती परम प्रभावक शिष्य सराकोद्धारक, नवचेतना प्रदायक षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज द्वारा दीक्षित मुनिश्री ज्ञेयसागर जी महाराज का गृहस्थ अवस्था का नाम अनिल जैन था। आपका जन्म 7 अप्रैल, 1959 को उत्तर प्रदेश प्रांत में जिला बागपत के वसोद ग्राम में श्रावक श्रेष्ठि श्री सुरेशचंद-विमलादेवी जैन के परिवार में हुआ था। आपकी लौकिक शिक्षा बड़ौत में हुई।

ऐसे बढ़े संयम पथ पर

सन् 2005 में आपने मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज से आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लेकर संयम के मार्ग पर चलने का दृढ़ संकल्प लिया। सन् 2003 में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दो प्रतिमाएं एवं सन् 2011 में उपाध्याय श्री ज्ञानसागर जी महाराज से सात प्रतिमाओं के व्रत स्वीकार किये। श्री अतिशय क्षेत्र बड़ागांव (बागपत) में सराकोद्धारक षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज से मुनि दीक्षा ग्रहण कर संयम के पथ पर चलना स्वीकार किया। आपने पूज्य गुरुदेव के साथ श्री अतिशय क्षेत्र बड़ागांव (उ.प्र.), श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी (म.प्र.), मुरेना (म.प्र.), श्री अतिशय क्षेत्र वहलना (उ.प्र.), आगरा (उ.प्र.), श्री अतिशय क्षेत्र तिजारा जी ( राज.), श्री अतिशय क्षेत्र वारां (कोटा) राजस्थान में चातुर्मास किये । 15 नबंवर 2020 को अतिशय क्षेत्र वारां में चातुर्मास के दौरान पूज्य गुरुदेव षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की समाधि होने के पश्चात 22 नबंवर 2020 में आपको छाणी परम्परा का सप्तम पट्टाचार्य घोषित किया गया । 23 अप्रैल 2021 को आचार्य श्री विनीतसागर जी महाराज ने संस्कारधानी धर्मनगरी मुरैना में आपके पट्टाचार्य संस्कार किये।

प्रदान की हैं चार दीक्षाएं

आपने अभी तक कुल 4 दीक्षाएं प्रदान की हैं-मुनिश्री ज्ञातसागर, आर्यिका श्री अमोघमती माताजी, आर्यिका अर्पणमती माताजी, आर्यिका अंशमति माताजी। पट्टाचार्य बनने के बाद आपने प्रथम चातुर्मास मुरैना एवं द्वितीय चातुर्मास सहारनपुर में किया है। पूज्य गुरुदेव की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से ए बी रोड मुरैना में नव निर्मित ज्ञानतीर्थ जैन क्षेत्र का श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक महोत्सव 01 फरवरी से 06 फरवरी 2023 तक आपके सान्निध्य में सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ।

कठोर साधना में लीन

सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज निर्दोषचर्या का पालन करते हुऐ कठोर साधना में लीन रहते हैं। फागुन अष्टाहिन्का पर्व के अवसर पर आपने आठ दिन का निर्जल उपवास किया। ऐसे परम् तपस्वी पूज्य गुरुदेव का तृतीय आचार्य पदारोहण दिवस सृष्टि मंगलम परिवार द्वारा श्री अतिशय क्षेत्र श्रीमहावीर जी में 23 अप्रैल 2023 को मनाया जा रहा है।

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Shreephal Jain News

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