वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश आचार्य 108 श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ का झीलों की नगरी उदयपुर में अभूतपूर्व स्वागत एवं विशाल शोभायात्रा के साथ मंगल प्रवेश हुआ। फतह स्कूल पहुंचने के बाद मेवाड़ वागड़ संभाग से आए हजारों समाज जनों ने आचार्य श्री संघ की भव्य अगवानी की। यहां से विशाल शोभायात्रा का विधिवत शुभारंभ हुआ। पढ़िए पारस चितौढ़ा की यह विशेष रिपोर्ट…
उदयपुर। वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश आचार्य 108 श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ का झीलों की नगरी उदयपुर में अभूतपूर्व स्वागत एवं विशाल शोभायात्रा के साथ मंगल प्रवेश हुआ। प्रात: 7.30 बजे आचार्यश्री संघ का गाजे-बाजे के साथ विशाल शोभायात्रा का बीएन कॉलेज संस्था से फतेह स्कूल के लिए विहार हुआ। फतह स्कूल पहुंचने के बाद मेवाड़ वागड़ संभाग से आए हजारों समाज जनों ने आचार्य श्री संघ की भव्य अगवानी की।
यहां से विशाल शोभायात्रा का विधिवत शुभारंभ हुआ। शोभायात्रा में सकल दिगंबर जैन समाज के हजारों समाज जन, सभी समाजों के अध्यक्ष बैंड बाजों की मधुर धुनों के साथ नाचते गाते और जयकारा लगाते हुए उमंग और उल्लास से चल रहे थे पूरे 21 वर्षों की साधना के बाद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के उदयपुर में मंगल प्रवेश के पल अत्यंत ही रोमांचकारी एवं अद्भुत थे। शोभायात्रा में 12 सफेद घोड़ों पर सवार श्रेष्ठीजन जैन पताका लहराते हुए श्रेष्ठीजन विराजमान थे।
मंगल कलश धारण किए थीं महिलाएं
शोभायात्रा में एक हाथी 6 बग्घियों में और आचार्यश्री की झांकियां सुशोभित हो रही थीं। शोभायात्रा में पीले वस्त्र धारी एवं लालचुन्दड़ी ओढ़े, हाथों में जैन ध्वज लहराते हुए माथे पर मंगल कलश धारण कर सैकड़ों महिलाएं शोभायात्रा में चल रही थीं। सभी भक्ति भाव से गुरुदेव के जयकारों के साथ आसमान गुंजायमान कर रही थी।
जगह- जगह पर समाज के श्रेष्ठ एवं श्रद्धालु शोभायात्रा का स्वागत कर वर्धमान सागर जी का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे थे। तेज धूप और गर्मी के बावजूद समाज जन एवं श्रद्धालुओं का उत्साह परवान पर था। 21 वर्षों की श्रद्धालुओं की, समाज जनों की साधना व तपस्या के बाद गुरुदेव के भव्य मंगल प्रवेश ने गर्मी में भी ठंडक घोल दी।
शोभा यात्रा का सर्व समाज द्वारा स्वागत किया गया। स्वागत करने वालों में प्रमुख रूप से राजपूत समाज, ब्राह्मण समाज, वैश्य समाज, सिख समाज, समाज, डांगी समाज, सुथार समाज, प्रजापत समाज के साथ ही भील समाज ने थाली मादल बजा कर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ का भव्य स्वागत किया। मेवाड़ वागड़ के विभिन्न क्षेत्रों से समाज जन बसों में बैठकर सवेरे आचार्यश्री की अगवानी करने पहुंचे और शोभायात्रा में शामिल हुए।

तेज धूप और गर्मी बेअसर
शोभायात्रा में उमंग और उत्साह इस कदर परवान पर रहा कि क्या बुजुर्ग, बच्चे, महिलाएं, युवक- युवतियां पूरे शोभायात्रा में नाचते गाते चल रहे थे। सभी भक्ति में इतने लीन थे कि तेज धूप और गर्मी भी उन पर बेअसर हो रही थी। शोभा यात्रा बीएन कॉलेज संस्थान एवं फतेह स्कूल होते हुए सूरजपोल, झीणीरेत, लखारा चौक, धानमंडी, संतोषी माता मंदिर, दिल्ली गेट एवं बाजार होते हुए नगर निगम में बने विशाल पंडाल में पहुंची। धर्म सभा में सकल दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष शांतिलाल वेलावत ने कहा कि आचार्य श्री आपके आगमन पर मेवाड़ वागड़ का पूरा सकल दिगंबर जैन समाज अति उत्साहित है।
आपके पधारने से सभी के भाग्य खुल गए हैं। हमने महावीर जयंती आचार्य श्री आप के सानिध्य में बनाने का संकल्प लिया था और आपने उसे स्वीकार कर हमारे भाग्य खोल दिये। आज आपके आगमन से मेवाड़ की धरती पवित्र हो गई है। वेलावत ने आचार्य जी से वर्ष 23-24 का चातुर्मास उदयपुर करने का निवेदन कर आचार्य श्री को श्रीफल चढ़ाया। धर्म सभा में शांतिलाल वेलावत को संघपति भामाशाह सम्मान प्रदान किया गया।













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