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इंडिया नेटबुक एवं बीपीए फाउंडेशन का समारोह : समाजसेवी सुधीर आचार्य को दिल्ली में मिला साहित्य समाज रत्न सम्मान


इंडिया नेटबुक एवं बीपीए फाउंडेशन दिल्ली द्वारा अंचल के सुपरिचित समाजसेवी, साहित्यकार और प्रेरक वक्ता डॉ सुधीर आचार्य को उनकी सामाजिक एवं समग्र साहित्य सेवा के लिए बीपीए साहित्य समाज रत्न सम्मान प्रदान किया गया। पढ़िये अजय जैन की ये विशेष रिपोर्ट… 


अम्बाह। इंडिया नेटबुक एवं बीपीए फाउंडेशन दिल्ली द्वारा अंचल के सुपरिचित समाजसेवी, साहित्यकार और प्रेरक वक्ता डॉ सुधीर आचार्य को उनकी सामाजिक एवं समग्र साहित्य सेवा के लिए बीपीए साहित्य समाज रत्न सम्मान दिल्ली के पांच सितारा होटल क्राउन प्लाजा में समारोह पूर्वक प्रदान किया गया। सुधीर आचार्य को समाज रत्न सम्मान हिंदी की सुप्रसिद्ध कथाकार चित्रा मुद्गल, व्यंग्य कार प्रेम जनमेजय, डॉ लालित्य ललित, इंडिया नेट बुक्स के डायरेक्टर डॉ संजीव कुमार, डॉ मनोरमा, डॉक्टर फारुख अफरीदी उपन्यासकार, केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा की निर्देशक बीना ने संयुक्त रूप से प्रदान किया।

हिन्दी साहित्य सेवा में योगदान

इस अवसर पर सुधीर आचार्य के परिचय में संचालक सहयोगी रणविजय राव ने कहा कि सुधीर आचार्य जितने संकल्प, समर्पण के साथ समाज के हर वर्ग की सेवा को समर्पित हैं, उतने ही हिन्दी साहित्य सेवा में उनका योगदान उल्लेखनीय है। डॉ सुधीर आचार्य दो दर्जन पुस्तकों का सम्पादन कर चुके हैं। चम्बल की लोक संस्कृति और सभ्यता और परम्पराओं पर उनका कार्य उत्तम श्रेणी में गिना जाता है। समाजसेवा और साहित्य सृजन द्वारा आचार्य चम्बल के गौरव में श्रीवृद्धि करने में जुटे हैं।

साहित्यकारों को आमंत्रण

इस अवसर पर अपने सम्बोधन में सुधीर आचार्य ने चम्बल के पुरातात्विक लोक सांस्कृतिक और सामाजिक स्वरूप को अभिव्यक्त करते हुए समस्त साहित्यकारों को चंबल अंचल मैं साहित्यिक आयोजन के लिए आमंत्रित किया।कार्यक्रम में वरिष्ठ आईएएस अनुज भटनागर, उपन्यासकार महेश पांडे, नाटककार प्रताप सहगल, मुकेश भारद्वाज संपादक जनसत्ता, वरिष्ठ अनुवादक सुभाष नीरज, प्रवासी संसार के संपादक राकेश पांडे, चाणक्य पत्रिका के संपादक अमित जैन, राही संस्थान के संचालक प्रबोध कुमार गोविल, संभावना दर्पण के संपादक गिरीश पंकज, उपन्यासकार हरि सुमन बिष्ट, व्यंग्यकार विवेक रंजन श्रीवास्तव, साहित्यकार गंगाराम राजी, गिरीश पंकज, मनोरमा ईयर बुक के प्रदीप कुमार, उर्मिला शिरीष, हरिप्रकाश राठी, अरुण खरे, स्वाति चौधरी सहित सैकड़ों साहित्यकार, संपादक और पत्रकार उपस्थित थे।

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