संत परिचय समाचार

पांच दिवसीय श्री 1008 पंच परमेष्ठी विधान आराधना एवं व्रतोद्यापन 14 दिसंबर से

सारांश

 

नांदणी (महाराष्ट्र)। परम पूज्य वात्सल्य वारिधि आचार्य 108 श्री वर्धमानसागर जी महाराज के आशीर्वाद से मुनि 108 श्री अपूर्वसागर जी महाराज, परम पूज्य मुनि 108 श्री अर्पितसागर महाराज जी के सानिध्य और परम पूज्य स्वस्ति श्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी जी के अधिनेतृत्व में आगामी 14 दिसंबर से पांच दिवसीय श्री 1008 पंच परमेष्ठी विधान आराधना एवं व्रतोद्यापन आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम श्रीमद देवाधिदेव 1008 भगवान आदिनाथ तीर्थंकर दिगंबर जिन मंदिर व स्वस्ति श्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य संस्थान मठ , नांदणी (महा) में होगा। पहले दिन 14 दिसंबर को सुबह छह बजे से मांगलिक कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इसमें प्रातः 6 बजे – मंगल निनाद, प्रातः 7 बजे – ध्वजारोहण, प्रातः 8 बजे – पंचामृत अभिषेक , महा शांतिधारा
प्रातः 9 बजे – पंच परमेष्ठी विधान प्रारंभ , रत्नत्रय व्रतोद्यापन 95 बीजाक्षर, दोपहर 1 बजे – मंगल प्रवचन, सायं 7 बजे – जाप्य , आरती कार्यक्रम होंगी। 15 दिसंबर को प्रातः 6 बजे – मंगल निनाद, प्रातः 7 बजे – पंचामृत अभिषेक , महा शांतिधारा, प्रातः 9 बजे – पंच परमेष्ठी विधान प्रारंभ, दशलक्षण व्रतोद्यापन, 110 बीजाक्षर, दोपहर 1 बजे – मंगल प्रवचन, स्वस्ति श्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी जी का दीक्षा दिवस समारोह, सायं 7 बजे – जाप्य, आरती कार्यक्रम होंगे। इसके बाद 16 दिसंबर को प्रातः 6 बजे – मंगल निनाद, प्रातः 7 बजे – पंचामृत अभिषेक , महाशांतिधारा, प्रातः 9 बजे – पंच परमेष्ठी विधान प्रारंभ , शुक्रवार व्रतोद्यापन 24 बीजाक्षर, दोपहर 1 बजे – मंगल प्रवचन, सायं 7 बजे – जाप्य , आरती जैसे कार्यक्रम होंगे। वहीं 17 दिसंबर को प्रातः 6 बजे – मंगल निनाद, प्रातः 7 बजे – पंचामृत अभिषेक , महा शांतिधारा, प्रातः 9 बजे – पंच परमेष्ठी विधान प्रारंभ , षोडशकारण व्रतोद्यापन 256 बीजाक्षर
दोपहर 1 बजे – मंगल प्रवचन , शांतमूर्ति आचार्य श्री देवसेन मुनि महाराज जी की 84वीं जन्म जयंती महोत्सव, सायं 7 बजे – जाप्य, आरती कार्यक्रम होंगे। इसके बाद 18 दिसंबर को प्रातः 6 बजे – मंगल निनाद, प्रातः 7 बजे – पंचामृत अभिषेक , महाशांतिधारा, प्रातः 9 बजे – पंच परमेष्ठी विधान प्रारंभ , शुभ मुहूर्त पर परम पूज्य यंत्र-मंत्र-तंत्र विषारद आचार्य श्री अक्किवाट विद्यासागर जी महाराज चरण स्थापना, श्री गणधर वलय विधान (निशिधिका) , क्षेत्रपाल मूर्ति स्थापना , 96 क्षेत्रपाल विधान , रविवार व्रतोद्यापन 81 बीजाक्षर, दोपहर 1 बजे – पिच्छी परिवर्तन , चातुर्मास कलश विसर्जन समारोह, दोपहर 2 बजे – मंगल प्रवचन, सायं 7 बजे – जाप्य, आरती आदि कार्यक्रम होंगे।

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