झुमरीतिलैया.राजकुमार अजमेरा। दिगंबर जैन समाज, झुमरीतिलैया के सानिध्य में इतिहास में प्रथम बार 24 समवशरण विधान के साथ विश्व शांति महायज्ञ कल्पद्रुम महामंडल विधान का भव्य आयोजन बीते दो अक्टूबर से 11 अक्टूबर तक हो रहा है। विधान के दूसरे दिन आज श्रमण श्री विशल्यसागर जी मुनिराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि ज्ञान तभी पूज्य बनता है, जब उसके स़ाथ वीतरागता और विनम्रता हो। यदि हम अहंकार के गुलाम हैं तो समझो अज्ञान हम पर हावी है पर यदि हम विनम्रता और वीतरागिता के पुजारी हैं तो इसका मतलब है कि ज्ञान का प्रकाश हमारे अंदर सुरक्षित है।
मुनि श्री ने कहा कि दिगम्बरत्व से समाज की पहचान है। दिगम्बरत्व के प्रति सच्ची आस्था और श्रद्धा ही हमारी सबसे बड़ी संपदा है। देव, शास्त्र, गुरु के प्रति हमेशा श्रद्धावनत रहो। इनके प्रति सच्ची आस्था ही हमें पार लगाएगी। देव,शास्त्र, गुरु की भक्ति संसार सागर को पार करने में एक नौका है, सेतु के समान है। विश्व शांति महायज्ञ को सफल बनाने में चातुर्मास कमेटी के संयोजक सुरेंद्र काला विधान संयोजक नरेंद्र झांझरी, राज छाबड़ा ,दिलीप बाकलीवाल अपने पूरे कार्यकर्ताओं के साथ विधान पूजा कार्य में लगे हुए हैं। आज प्रातः देवाधिदेव 1008 शीतलनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा चक्रवर्ती ओर सौधर्म इंद्र के द्वारा किया गया।

इसके बाद भगवान के समवशरण में बैठने का सौभाग्य मुख्य चक्रवर्ती सुशील-शशि छाबड़ा, सौधर्म इंद्र ललित-नीलम सेठी, कुबेर सुरेंद्र- सरिता काला, ध्वजारोहण कर्ता शांतिलाल-राजेशवरी छाबड़ा को प्राप्त हुआ। दूसरे समवशरण में बैठ कर पूजा करने का सौभाग्य विशेष चक्रवर्ती सुरेश-प्रेम झांझरी, मुख्य कलश स्थापनकर्ता जय कुमार-त्रिशला गंगवाल को प्राप्त हुआ। आज पूजन प्रारंभ करने के साथ देवाधिदेव1008 श्री शीतलनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक मनाया गया, जिसमें समाज श्रेष्ठी सुरेश-प्रेम, नरेंद झांझरी परिवार को निर्वाण लड्डू चढ़ाया।
इसके साथ ही आज विधान की पूजन कर समवशरण के मंडप पर 151 अर्घ्य के साथ श्रीफल चढ़ाया गया। सभी विधान की क्रिया अलका दीदी, भारती दीदी एवं रायपुर से आये ज्योतिषचार्य पंडित अजीत जैन शास्त्री के निर्देशन में हो रही है। आज समाज के सभी पदाधिकारी, त्रिशला ग्रुप की ओर से महाआरती किया गया। यह जानकारी जैन समाज के मीडिया प्रभारी राजकुमार अजमेरा और नवीन जैन ने दी।












