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अर्हचक्र चौबीसी समवशरण महामंडल विधान में महाआरती में झूमे श्रद्धालु

मडावरा(ललितपुर).राजीव सिंघई। वर्णीनगर, मडावरा में आयोजित हो रहे अर्हचक्र चौबीसी समवशरण महामंडल विधान के दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री 108 निर्यापक श्रमण अभय महाराज ने कहा कि भक्ति में वह शक्ति विद्यामान होती है, जो शरीर के सभी रोगों को दूर कर देती है। भगवान के अभिषेक का गंधोदक केवल माथे पर लगाने से ही इसकी ऊर्जा से पूरे शरीर के रोग दूर हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि इस पांडाल में बने 24 तीर्थंकरों का समवशरण मानो स्वर्ग लगता है।

अर्हचक्र चौबीसी समवशरण महामंडल विधान में सोमवार को सुबह पांडाल में विधानाचार्य ब्र. प्रदीप भैया सुयश के निर्देशन में श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा करने का सौभाग्य सौधर्म इंद्र परिवार अजय जैन, ग्राम प्रधान गोरा-रजौला, राजीव जैन रजौला परिवार, महायज्ञ नायक परिवार, निर्मल, रानू जैन, दीपक जैन दुकान वाले, सन्मति जैन सहारा परिवार, संदीप जैन, संदेश जैन परिवार को प्राप्त हुआ। शांतिधारा के पश्चात अर्हचक्र महामंडल विधान के अर्घ्य समर्पित किए गए।

सायंकाल में सौधर्म इंद्र परिवार के रूप श्रीजी की संगीतमयी महाआरती करने का सौभाग्य अजय जैन, अनिल जैन, राजीव जैन रजौला परिवार को प्राप्त हुआ। मुनिश्री ससंघ को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य वीरेंद्र जैन, देवेंद्र कुमार जैन साढूमल झंडा वाले परिवार को प्राप्त हुआ। रात्रि में सत्येंद्र शर्मा पार्टी कंठस्थ कला केंद्र दिल्ली की टीम के कलाकारों ने मित्रता पर आधारित नाटिका श्रीकृष्ण और सुदामा के जीवन चरित्र को दर्शाया। धर्मसभा के दौरान पैसा का लालच शीर्षक से नाटिका का मंचन किया गया।

समयसार व प्रवचनसार ग्रथों का हुआ विमोचन
चातुर्मास समिति के महामंत्री डॉ. राकेश जैन सिंघई, मंत्री राजेश जैन सौंरया ने बताया कि देश के प्रख्यात विद्वान स्व. पं. हीरालाल सिद्धांत शास्त्री साढूमल के सुपुत्र वीरेंद्र जैन, देवेंद्र जैन झंडा वालों ने समयसार, प्रवचनसार का पद्यानुवाद करवाया, जिसका विमोचन नगर में विराजमान सप्तम निर्यापक श्रमण मुनिश्री अभय सागर, श्रमण मुनिश्री प्रभात सागर, श्रमण मुनिश्री निरीह सागर महाराज के मंगल आशीर्वाद से उनके समक्ष ब्र. प्रदीप भैया सुयश अशोकनगर, वीरेंद्र जैन, देवेंद्र जैन हीरा आश्रम साढूमल, डॉ. बिरधीचंद्र जैन, डॉ. राकेश जैन सिंघई, सुधीर जैन सिंघई एवं पावन अमृत वर्षायोग समिति के पदाधिकारियों ने किया।

विमोचन अवसर पर देवेंद्र जैन हीरा आश्रम साढूमल ने प्रकाशित ग्रंथों की विशेष जानकारी देते हुए बताया कि पं. हीरालाल सिद्धांताचार्य के षठखंडगम, कषाय पहुड पाहुड, जैन धर्मामृत, श्रावकाचार संग्रह हैं। श्रावचार संग्रह के पांच भाग हैं जिसमें बत्तीस श्रवकाचारों का संग्रह है, जिनमें सहस्त्रनाम इत्यादि प्रकाशित ग्रन्थ एवं अप्रकाशित ग्रंथ नेमिचरित्र पार्श्वनाथ चरित्र, महावीर चरित्र, आचार्य कुंदकुंदाचार्य द्वारा प्राकृत भाषा में रचित पाहुड़ गाथाओं का हिंदी में पद्यानुवाद बुन्देलखण्ड साहित्य उन्नयन समिति और अनामिका प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है। वर्तमान में दो वर्ष पूर्व समयसार, प्रवचनसार ग्रंथों का पद्यानुवाद प्रकाशित हुआ है, जो आज समाज के समक्ष प्रस्तुत हैं। साथ में ही उनके पुत्र डॉ. नरेन्द्र कुमार जैन एवं वीरेन्द्र कुमार जैन प्राकृतिक चिकित्सक ने औषधि विहीन स्वश्रयी प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियां श्रवण संस्कति पर आधारित एवं विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों का तुलनात्मक अध्ययन इस पुस्तक में किया गया है। इसका प्रकाशन यश पब्लिकेशन, दिल्ली ने किया है।

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