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श्रावक बनना कठिन, श्रमण बनना उससे भी कठिन-मुनि श्री आदित्य सागर जी


श्रावकाचार श्रमणाचार विषयक संगोष्ठी का दूसरे दिन


न्यूज़ सौजन्य – राजेश दद्दू

इंदौर। मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने कहा कि आपके और हमारे पुण्य का उदय है कि इस पंचम काल में भी हमें जिनवाणी का श्रवण एवं मंथन करने का अवसर मिल रहा है। श्रावक और श्रमण की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि श्रावक बनना कठिन है तो श्रमण बनना उससे भी कठिन है। आपने यह भी कहा कि हमारे प्राचीन आचार्यों ने, जो आगम साहित्य का सृजन किया है, उसके संरक्षण के लिए समाज एवं विद्वान आगे आएं।
यह बात मुनि श्री ने समोसरण मंदिर, कंचन बाग में रविवार को श्रावकाचार श्रमणाचार विषय पर चल रही संगोष्ठी के दूसरे दिन प्रातः कालीन के तृतीय सत्र में अपने समीक्षात्मक प्रवचन में कही। संगोष्ठी की अध्यक्षता डॉ. सुरेंद्र भारती बुरहानपुर ने की एवं सारस्वत अतिथि जैन गणित के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वान डॉ अनुपम जैन इंदौर थे। इस अवसर पर मुनि श्रीअप्रमित सागर जी एवं मुनि श्री सहज सागर जी भी उपस्थित थे। गोष्ठी में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के जैन दर्शन विभाग के प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार जैन ने श्रमणाचार में ध्यान और उपयोग पर, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के भाषा विज्ञान प्रोफेसर वृषभदास जैन ने जैन आगम साहित्य के संवर्धन में श्रमणों एवं श्रावकों के योगदान पर एवं केंद्रीय विश्वविद्यालय जयपुर में जैन दर्शन विभाग में संकाय प्रमुख प्रोफेसर श्रेयांस सिंघई ने एकल बिहारी मुनि विषय पर अपने अपने शोध पूर्ण आलेख प्रस्तुत किए।

विद्वानों का परिश्रम विद्वान ही जानते हैंः जैन विद्वान पं. रतन लाल

इस अवसर पर मूर्धन्य जैन विद्वान पंडित रतन लाल शास्त्री इंदौर ने अपने आशीर्वचन में कहा कि जंगल में शेर का बल शेर ही जानता है, मूषक नहीं। इसी प्रकार विद्वानों का परिश्रम विद्वान ही जानते हैं। विद्वानों के पास ज्ञान का खजाना होता है, यह संगोष्ठी में भाग लेने वाले विद्वानों ने साबित कर दिया है। गोष्ठी में नवागढ़ विरासत एवं दिगंबर जैन तीर्थ निर्देशिका का विमोचन अतिथि विद्वानों द्वारा किया गया। संचालन डॉ. ज्योति जैन खतौली ने किया।
दोपहर में चतुर्थ सत्र प्रोफेसर वृषभ प्रसाद एवं डॉक्टर श्रेयांश जैन की अध्यक्षता में प्रारंभ हुआ। इसमें डॉक्टर सुनील संचय ललितपुर, पंडित सुरेश मारोरा, डॉक्टर पंकज जैन, डॉक्टर बाहुबली जैन एवं डॉ आशीष शास्त्री ने अपने आलेख प्रस्तुत किए। इस अवसर पर डॉक्टर जैनेंद्र जैन, आजाद जैन, टी के वेद, अशोक खासगीवाला आदि गणमान्य लोग उपस्थित थे। आभार हंसमुख गांधी ने जताया।

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