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अष्टानिका महापर्व का समापन: “शुभ काल बार-बार आता है, लेकिन शुभ क्षण कभी-कभी ही प्राप्त होते हैं” — आचार्य श्री विमर्शसागर


देहरा तिजारा में अष्टानिका महापर्व का समापन पूज्य श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महाराज के प्रेरणादायी प्रवचन के साथ हुआ। गुरुदेव ने धर्म, संयम, सिद्ध आराधना और कर्मों की शुद्धि का संदेश देकर श्रद्धालुओं को आत्मकल्याण का मार्ग बताया। पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की यह रिपोर्ट।


देहरा तिजारा (अलवर)। श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, देहरा तिजारा में विराजमान परम पूज्य राष्ट्रयोगी श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में आयोजित अष्टानिका महापर्व का समापन श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धर्मसभा में उपस्थित होकर गुरुदेव के मंगल प्रवचनों का लाभ प्राप्त किया।

जीवन को सफल बनाने का संदेश

अपने मंगल प्रवचन में आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य जीवन जल की एक बूंद के समान क्षणभंगुर है। इसलिए प्रत्येक क्षण को धर्म, संयम, भक्ति और आत्मचिंतन में लगाकर जीवन को सफल बनाना चाहिए। सिद्ध परमात्माओं के गुणों का स्मरण एवं चिंतन आत्मा को मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर करता है।

शुभ काल और शुभ क्षण का अंतर

मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन एवं प्रचार मंत्री उमंग जैन ने बताया कि आचार्य श्री ने कहा कि शुभ काल तो बार-बार आता है, लेकिन शुभ क्षण बहुत दुर्लभ होते हैं। अष्टानिका महापर्व एक शुभ काल है, परंतु जिन्होंने इस दौरान संयम, तप, स्वाध्याय, सिद्ध आराधना और गुरु सान्निध्य प्राप्त किया, उन्होंने वास्तव में शुभ क्षणों का सदुपयोग किया।

धर्म नहीं बदलता, बदलते हैं कर्म

आचार्य श्री ने कहा कि धर्म शाश्वत और सनातन है। परिवर्तन यदि होता है तो केवल जीव के कर्मों में होता है। भगवान की सच्ची भक्ति, सिद्धों की आराधना और गुरुओं का सान्निध्य कर्मों की शुद्धि का माध्यम बनते हैं तथा आत्मा को धर्म के वास्तविक स्वरूप तक पहुंचाते हैं।

पर्व की साधना जीवन में उतारने का आह्वान

गुरुदेव ने श्रद्धालुओं से कहा कि अष्टानिका महापर्व में किए गए संयम, तप, पूजा और स्वाध्याय को केवल पर्व तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। यही पर्व की वास्तविक सफलता और आत्मकल्याण का मार्ग है।

श्रद्धालुओं की रही उल्लेखनीय सहभागिता

इस अवसर पर मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन, नरेंद्र जैन, प्रचार मंत्री उमंग जैन, चातुर्मास अध्यक्ष सुरेश जैन (पटेल), सुभाष जैन (हरसोलीवाले), संजय जैन, विनय जैन, नीरज जैन, सचिन जैन, वरुण जैन (चिंटू), राकेश जैन (मामू) सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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