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जनकपुरी में आचार्य आदित्य सागर जी ससंघ के सानिध्य में भव्य चातुर्मास मंगल कलश स्थापना सम्पन्न : देशभर से उमड़े श्रद्धालु, संयम और आत्मकल्याण का मिला संदेश


जयपुर के जनकपुरी स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर में आचार्य श्री 108 आदित्य सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में चातुर्मास मंगल कलश स्थापना महोत्सव श्रद्धा और धार्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। हजारों श्रद्धालुओं ने धर्मसभा में सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया। पढ़िए श्रीफल साथी उदयभान जैन की यह रिपोर्ट।


जयपुर। श्री दिगम्बर जैन मंदिर, जनकपुरी–ज्योतिनगर, इमली फाटक में रविवार को परम पूज्य आचार्य श्री 108 आदित्य सागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में चातुर्मास मंगल कलश स्थापना महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं धार्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा तथा भगवान नेमिनाथ एवं आचार्य श्री के जयघोषों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

धार्मिक विधानों से हुआ शुभारम्भ

वर्षायोग समिति के मुख्य संयोजक पदम जैन बिलाला के अनुसार महोत्सव का शुभारम्भ झण्डारोहण चेतन–रेखा छाबड़ा परिवार द्वारा तथा दीप प्रज्वलन विनय–नवीन सेठी परिवार द्वारा किया गया। पाद प्रक्षालन का सौभाग्य अशोक–शकुन्तला चाँदवाड़ परिवार को प्राप्त हुआ, जबकि शास्त्र भेंट कनफूल देवी कासलीवाल परिवार द्वारा अर्पित की गई।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समा

मंदिर समिति के अध्यक्ष बुद्धि प्रकाश छाबड़ा एवं मंत्री देवेंद्र कासलीवाल ने बताया कि जनकपुरी महिला मंडल, विद्या वसु पाठशाला, जैन पाठशाला जनकपुरी तथा शांतिनाथ युवा मंडल के विद्यार्थियों ने मंगलाचरण एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। अनिता बिंदायक्या एवं पुष्पा बिलाला द्वारा प्रस्तुत लघु हास्य नाटिका भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही।

109 कलशों की हुई स्थापना

कलश आवंटन समिति के सोभाग अजमेरा एवं संजय कासलीवाल ने बताया कि प्रथम से पंचम मंगल कलश विभिन्न पुण्यशाली परिवारों द्वारा स्थापित किए गए। पुण्य कलश स्थापना का सौभाग्य अशोक चाँदवाड़ परिवार तथा कैलाश–मानक–रमेश ठोलिया परिवार को प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त शेष 104 कलश भी श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक स्थापित किए।

चातुर्मास आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ अवसर

धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री आदित्य सागर जी महाराज ने कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, स्वाध्याय, तप और आध्यात्मिक उन्नति का अनुपम अवसर है। यदि व्यक्ति इन चार महीनों में धर्म का एक भी संस्कार जीवन में स्थायी रूप से उतार ले, तो उसका जीवन धन्य हो सकता है।

देशभर से पहुंचे श्रद्धालु

कार्यक्रम में राजस्थान जैन सभा, युवा महासभा, मंदिर महासमिति, जैन पत्रकार महासंघ, जैन बैंकर्स फोरम, धर्म जागृति संस्थान सहित अनेक सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। जयपुर के विभिन्न क्षेत्रों के साथ-साथ फिरोजाबाद, आगरा, गुरुग्राम, धारूहेड़ा, अलवर, अशोक नगर, तारानगर एवं अन्य नगरों से हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

आभार एवं वात्सल्य भोज

कार्यक्रम का प्रभावी संचालन पं. जिनेश शास्त्री (चीकू) ने किया। अंत में वर्षायोग समिति ने मंदिर प्रबंध समिति, महिला मंडल, जैन युवा मंच, सभी अतिथियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया तथा आगामी चातुर्मास के धार्मिक आयोजनों में सहभागिता का आह्वान किया। कार्यक्रम के उपरांत सभी श्रद्धालुओं के लिए वात्सल्य सहभोज की व्यवस्था की गई।

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