सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में 26 जुलाई को निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 समतासागर जी महाराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश होगा। विशाल शोभायात्रा, पारंपरिक सांस्कृतिक दलों, धर्मध्वज एवं हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता के साथ ऐतिहासिक अगवानी की जाएगी। पढ़िए श्रीफल साथी जयकुमार जैन जलज की यह रिपोर्ट।
कुण्डलपुर (दमोह)। सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर, बड़े बाबा की नगरी एवं आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की साधना स्थली पर 26 जुलाई को निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 समतासागर जी महाराज ससंघ का भव्य एवं ऐतिहासिक मंगल प्रवेश होगा। इस पावन अवसर को लेकर सम्पूर्ण जैन समाज में श्रद्धा, उत्साह और उल्लास का वातावरण है।
ऐतिहासिक अगवानी की तैयारियाँ पूर्ण
प्रचार मंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया कि मंगल आगवानी शोभायात्रा को ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए सभी तैयारियाँ पूर्ण कर ली गई हैं। शोभायात्रा में देशभर से आए श्रद्धालु एवं समाजजन अनुशासित रूप से सहभागिता करेंगे।
शोभायात्रा होंगे अनेक आकर्षण
मंगल प्रवेश शोभायात्रा में मुड़िया बैंड की मधुर प्रस्तुतियाँ, महारानी लक्ष्मीबाई की वेशभूषा में सुसज्जित आठ अश्वारोही वीरांगनाएँ, 14 बग्गियों पर धर्मध्वज तथा विभिन्न जैन समाजों की आकर्षक झाँकियाँ प्रमुख आकर्षण रहेंगी। इसके अतिरिक्त देवरी अखाड़ा, बरेदी दल, ढिमरयाई, रमतूला दल, ग्वाल टीम पटेरा, दल-दल अश्व एवं गोरझामर दिव्य घोष सहित अनेक पारंपरिक सांस्कृतिक दल अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे।
महिला मंडलों की रहेगी विशेष सहभागिता
दमोह, हटा, बांदकपुर, बनवार, अभाना, नोहटा, जबेरा, सिंग्रामपुर, तेजगढ़, तेंदूखेड़ा, तारादेही, पथरिया, बांसा सहित अनेक नगरों एवं मंदिरों के महिला मंडल पारंपरिक वेशभूषा में धर्मध्वज, मंगल कलश एवं भक्ति भाव के साथ शोभायात्रा में सहभागी बनेंगे।
हजारों श्रद्धालु बनेंगे साक्षी
आयोजन में कुण्डलपुर क्षेत्र कमेटी, मुनि सेवा समिति, ब्रह्मचारी भैया-बहिन, पूर्णायु, हथकरघा समूह, कुण्डलपुर स्टाफ, गुरु संघ, दमोह जिला जैन समाज, बुंदेलखंड जैन समाज तथा देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। आयोजन समिति ने सभी धर्मप्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर पूज्य बड़े बाबा एवं मुनिश्री ससंघ के दर्शन एवं आशीर्वाद का पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की है।
आध्यात्मिक इतिहास का बनेगा स्वर्णिम अध्याय
समिति के अनुसार यह मंगल प्रवेश कुण्डलपुर के धार्मिक इतिहास में एक अविस्मरणीय अध्याय सिद्ध होगा और धर्म, संयम एवं जिनशासन की प्रभावना का प्रेरणादायी संदेश देगा।













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