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इस वर्ष नौका में सवार होकर आएंगी माता रानी : 15 जुलाई से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि


आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 15 जुलाई से होगा। इस वर्ष तिथि परिवर्तन के कारण एक तिथि का क्षय और एक तिथि की वृद्धि रहेगी। ज्योतिषाचार्य हुकुमचंद-हिमांशु जैन ने बताया कि माता रानी नौका पर सवार होकर आएंगी, जो जनकल्याण, सुख-शांति और समृद्धि का संकेत माना जाता है। पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट।


मुरैना। वर्षभर में चार नवरात्रि मनाई जाती हैं, जिनमें आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि की तरह इसमें सार्वजनिक आयोजन कम होते हैं, जबकि देवी की गुप्त साधना, दुर्गा सप्तशती पाठ, हवन, उपासना एवं तंत्र साधना का विशेष महत्व रहता है।

15 जुलाई से होगी शुरुआत

ज्योतिषाचार्य हुकुमचंद-हिमांशु जैन ने बताया कि इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की घट स्थापना 15 जुलाई बुधवार को प्रतिपदा तिथि में होगी। प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई मंगलवार दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से प्रारंभ होकर 15 जुलाई बुधवार को सुबह 11 बजकर 51 मिनट तक रहेगी।

घट स्थापना का शुभ मुहूर्त

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में घट स्थापना का शुभ समय 15 जुलाई बुधवार को प्रातः 5 बजकर 33 मिनट से 10 बजकर 9 मिनट तक रहेगा।

तिथियों में रहेगा परिवर्तन

इस वर्ष चतुर्थी तिथि का क्षय रहेगा। तृतीया और चतुर्थी दोनों तिथियां 17 जुलाई शुक्रवार को रहेंगी। वहीं नवमी तिथि 22 जुलाई बुधवार एवं 23 जुलाई गुरुवार को रहेगी। 23 जुलाई गुरुवार को गुप्त नवरात्रि का समापन होगा।

नौका पर सवार होकर आएंगी माता रानी

मान्यता के अनुसार इस वर्ष गुप्त नवरात्रि में माता रानी नौका पर सवार होकर आएंगी। नौका पर देवी का आगमन जनकल्याण, सुख-शांति, समृद्धि एवं उन्नति का प्रतीक माना जाता है। यह वर्षा और कृषि के लिए भी अनुकूल संकेत माना जाता है।

दस महाविद्याओं की होती है आराधना

गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की साधना का विशेष महत्व है। श्रद्धा एवं विधि-विधान से साधना करने पर साधक को देवी की विशेष कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

देवी की दस महाविद्याएं

– कमलात्मिका

– तारा

– बगलामुखी

– काली

– त्रिपुर सुंदरी

– धूमावती

– भैरवी

– भुवनेश्वरी

– मातंगी

– छिन्नमस्ता

आध्यात्मिक साधना का पर्व

गुप्त नवरात्रि साधना, आत्मशुद्धि और देवी आराधना का विशेष पर्व माना जाता है। इन नौ दिनों में श्रद्धालु उपवास, मंत्र जाप, पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से मां दुर्गा की आराधना करते हैं।

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