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12 जुलाई को इंदौर में होगा आचार्य श्री सुनील सागर महाराज का मंगल प्रवेश : 38 पिच्छीधारी मुनि संघ के सान्निध्य में तीन दिवसीय प्राकृत महोत्सव भी होगा


आचार्य श्री 108 सुनील सागर महाराज का 38 पिच्छीधारी मुनि संघ सहित 12 जुलाई को इंदौर में भव्य मंगल प्रवेश होगा। 11 जुलाई को नवग्रह अतिशय क्षेत्र में मंगल मिलन तथा 12 से 14 जुलाई तक प्राकृत महोत्सव आयोजित किया जाएगा। पढ़िए श्रीफल साथी की यह रिपोर्ट।


इंदौर। आचार्य श्री 108 सुनील सागर महाराज का 38 पिच्छीधारी मुनि संघ सहित इंदौर नगर में भव्य मंगल प्रवेश 12 जुलाई को होगा। इससे पूर्व 11 जुलाई को दोपहर 3 बजे श्री दिगंबर जैन नवग्रह अतिशय क्षेत्र में अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज से उनका चरण वंदन एवं मंगल मिलन होगा। इस अवसर पर क्षेत्र के अध्यक्ष नरेंद्र वेद, शकुंतला वेद तथा समाजजन आचार्य संघ का भावपूर्ण स्वागत करेंगे।

11 जुलाई को होगा मंगल मिलन

11 जुलाई को नवग्रह अतिशय क्षेत्र में आयोजित मंगल मिलन कार्यक्रम में श्रद्धालु आचार्य श्री का चरण वंदन करेंगे। यह आयोजन नगर प्रवेश से पूर्व आध्यात्मिक मिलन का विशेष अवसर होगा।

राजवाड़ा से निकलेगी भव्य शोभायात्रा

12 जुलाई को प्रातः 7:30 बजे राजवाड़ा से नगर प्रवेश शोभायात्रा प्रारंभ होगी। मार्ग में नेमिनगर जैन कॉलोनी के अध्यक्ष कैलाश लुहाड़िया, मुख्य संयोजक इन्द्र कुमार सेठी सहित विभिन्न जैन संस्थाएं एवं समाजजन आचार्य श्री का स्वागत एवं चरण वंदन करेंगे। आचार्य श्री का वर्ष 2026 का चातुर्मास जैन कॉलोनी में संपन्न होगा।

महावीर कीर्ति स्तंभ पर होगा भव्य स्वागत

शोभायात्रा रीगल स्थित महावीर कीर्ति स्तंभ पहुंचेगी, जहां उदासीन आश्रम ट्रस्ट, श्री दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद (कीर्ति स्तंभ), दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन, महावीर ट्रस्ट तथा अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज के मार्गदर्शन में विभिन्न संस्थाओं द्वारा पाद प्रक्षालन एवं भव्य स्वागत किया जाएगा। इसके पश्चात उदासीन आश्रम स्थित महावीर मंदिर में धर्मसभा आयोजित होगी।

तीन दिवसीय प्राकृत महोत्सव

उदासीन आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल ने बताया कि 12 से 14 जुलाई तक तीन दिवसीय प्राकृत महोत्सव आयोजित किया जाएगा। देशभर से प्राकृत भाषा के विद्वान इसमें सहभागिता करेंगे। प्रतिदिन प्रातः 8 बजे एवं दोपहर 2 बजे आचार्य श्री के सान्निध्य में प्राकृत भाषा एवं जैन साहित्य पर विशेष परिचर्चाएं आयोजित होंगी।

प्राकृताचार्य के रूप में विशिष्ट पहचान

आचार्य श्री सुनील सागर महाराज को ‘प्राकृताचार्य’ की उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने प्राकृत भाषा में अनेक ग्रंथों, स्तुतियों एवं साहित्यिक कृतियों की रचना कर जैन साहित्य को समृद्ध किया है। उनका साहित्यिक एवं आध्यात्मिक योगदान देशभर में विशेष रूप से सराहा जाता है।

धर्म और ज्ञान का महापर्व

आयोजकों के अनुसार नगर प्रवेश, धर्मसभा एवं प्राकृत महोत्सव के माध्यम से इंदौर में धर्म, संस्कृति और जैन साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन का महत्वपूर्ण संदेश प्रसारित होगा तथा हजारों श्रद्धालुओं को धर्म लाभ प्राप्त होगा।

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