लव-कुश की मोक्षस्थली और गुजरात की पवित्र सिद्धभूमि पावागढ़ में गुरुवार को आध्यात्मिक आस्था और वैराग्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। अर्हम ध्यान योग के प्रणेता मुनि श्री 108 प्रणम्यसागर जी महाराज के सान्निध्य में भव्य जनेश्वरी मुनि दीक्षा महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के बीच संपन्न हुआ। पावागढ़ से पढ़िए, श्रीफल साथी की यह रिपोर्ट…
पावागढ़ (गुजरात)। लव-कुश की मोक्षस्थली और गुजरात की पवित्र सिद्धभूमि पावागढ़ में गुरुवार को आध्यात्मिक आस्था और वैराग्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। अर्हम ध्यान योग के प्रणेता मुनि श्री 108 प्रणम्यसागर जी महाराज के सान्निध्य में भव्य जनेश्वरी मुनि दीक्षा महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के बीच संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर देशभर से हजारों श्रद्धालु उपस्थित होकर धर्मलाभ अर्जित करने पहुंचे। कार्यक्रम का शुभारंभ संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके पश्चात बड़ौदा करेलीबाग महिला मंडल द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
नए नामकरण कर दीक्षा विधि हुई पूरी
यह दीक्षा महोत्सव आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की प्रेरणा और आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से आयोजित किया गया। इस अवसर पर चार ऐलकों ने सांसारिक जीवन का त्याग कर जैन परंपरा के अनुसार केशलोंच सहित मुनि दीक्षा ग्रहण की। दीक्षा विधि मुनि श्री 108 प्रणम्यसागर जी महाराज के सान्निध्य में संपन्न हुई। दीक्षा उपरांत उनके नवीन नामों की घोषणा की गई। अब ये चारों नवदीक्षित मुनिराज मुनि श्री अनूलय सागर जी महाराज, मुनि श्री अनुरूप सागर जी महाराज, मुनि श्री अनुगम सागर जी महाराज और मुनि श्री अनुषंग सागर जी महाराज के नाम से जाने जाएंगे।
भाव विभोर हुए श्रद्धालुगण
दीक्षा ग्रहण करते ही चारों साधकों ने समस्त सांसारिक बंधनों का त्याग कर संयम, तप और आत्मकल्याण के मार्ग को अपना लिया। इस दिव्य क्षण को देखकर उपस्थित हजारों श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
समारोह में यह रहे मौजूद
समारोह में भारतवर्ष के प्रतिष्ठित पंडित प्रदीप जी, निखिल भैया, जैन समाज के प्रख्यात भामाशाह अशोक पाटनी परिवार, गुजरात के कटारिया परिवार, अर्हम योग संस्थान के चेयरमैन, पावागढ़ सिद्धक्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी एवं ट्रस्टीगण, सतना राजघराना परिवार, बावनगजा बड़वानी की समाज और दीक्षार्थियों के परिजन विशेष रूप से उपस्थित रहे।
आत्मा की शुद्धि की दिशा में बढ़ने का महान मार्ग
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि मुनि दीक्षा केवल बाह्य त्याग नहीं है, बल्कि यह राग, द्वेष, मोह और समस्त सांसारिक आसक्तियों का परित्याग कर आत्मा की शुद्धि की दिशा में बढ़ने का महान मार्ग है। संयम, तप और साधना ही मोक्ष प्राप्ति का वास्तविक साधन है। दीक्षा महोत्सव में दिल्ली, उज्जैन, इंदौर, सूरत, अहमदाबाद, बांसवाड़ा, घाटोल, रुड़की, जयपुर, बड़ोदिया, बड़ौदा और दाहोद सहित देश के विभिन्न नगरों से हजारों श्रद्धालु एवं समाजजन पहुंचे। पूरे आयोजन के दौरान णमोकार महामंत्र और जयघोषों से सिद्धक्षेत्र गुंजायमान रहा।
चातुर्मास हेतु विराजमान होने का विनम्र आग्रह
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न नगरों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने मुनि श्री 108 प्रणम्यसागर जी महाराज से वर्ष 2026 के चातुर्मास हेतु अपने-अपने नगर में विराजमान होने का विनम्र आग्रह किया और श्रद्धापूर्वक श्रीफल अर्पित कर निवेदन प्रस्तुत किया। आयोजन समिति ने समापन पर कहा कि ऐसे दुर्लभ आयोजन समाज में संयम, संस्कार, त्याग और आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करते हैं तथा नई पीढ़ी को धर्ममार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। समिति ने समस्त संतवृंद, भामाशाहों, सहयोगी संस्थाओं, स्वयंसेवकों और देशभर से पधारे श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।













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