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मोक्ष मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है ख्याति : आचार्य विमर्श सागर जी के सान्निध्य में वैरागी ब्रह्मचारियों की विनौली यात्रा एवं गोद भराई संपन्न


गुरुग्राम के डीएलएफ फेस-2 स्थित श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज के सान्निध्य में वैरागी ब्रह्मचारियों की विनौली यात्रा एवं गोद भराई का धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हुआ। आचार्य श्री ने मोक्ष मार्ग में ख्याति की इच्छा को सबसे बड़ी बाधा बताया। पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की यह रिपोर्ट।


गुरुग्राम। डीएलएफ फेस-2 स्थित श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर में परमपूज्य जिनागम पंथ प्रवर्तक भावलिंगी संत दिगंबराचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज अपने चतुर्विध संघ सहित पधारे। स्थानीय जैन समाज ने भव्य मंगल अगवानी की। इस अवसर पर वैराग्य पथ पर अग्रसर ब्रह्मचारी भैयाजी की अनुमोदना तथा विनौली यात्रा एवं गोद भराई का धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धापूर्वक सम्पन्न हुआ।

दीक्षार्थियों ने व्यक्त किए वैराग्य के भाव

कार्यक्रम में पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महामुनिराज से दिगंबर जैन दीक्षा प्राप्त करने वाले वैरागी दीक्षार्थियों—बाल ब्रह्मचारी अंकित भैयाजी (प्रतापगढ़), अनिकेत भैयाजी (मुंबई), यश भैयाजी (अहमदाबाद), प्रसन्ना भैयाजी (औरंगाबाद) एवं वकीलचंद भैयाजी (बड़ौत)—ने अपने वैराग्य जीवन, गुरु कृपा और दीक्षा प्रेरणा के अनुभव साझा किए। ब्रह्मचारी वकीलचंद भैयाजी ने कहा कि उनके भीतर वैराग्य का बीज वर्ष 2014 में आचार्य श्री विमर्श सागर जी ने रोपा था, जो आज दीक्षा के रूप में फलित हो रहा है।

कर्म चेतना का किया सरल विवेचन

अपने प्रवचन में आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज ने कहा कि इस जगत में कर्म चेतना और कर्मफल चेतना—दो प्रकार की चेतनाएं होती हैं। अधिकांश जीव कर्मों के प्रभाव में बंधे रहते हैं, जबकि विरले ही जीव शुभ कर्म चेतना के माध्यम से आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ पाते हैं। उन्होंने दीक्षार्थियों को शुभ कर्म चेतना से शुद्ध कर्म चेतना की ओर अग्रसर होने का आशीर्वाद दिया।

ख्याति की इच्छा मोक्ष मार्ग में बाधा

आचार्य श्री ने कहा कि वर्तमान समय में संतानों का जन्म तो हो रहा है, लेकिन मुनिराजों का जन्म दुर्लभ होता जा रहा है। उन्होंने अभिभावकों से संस्कारवान एवं धर्मनिष्ठ संतानों के निर्माण का आह्वान करते हुए कहा कि जिनशासन में मोक्ष मार्ग पर चलने वाले साधक के लिए ख्याति की इच्छा सबसे बड़ी बाधा है। जो व्यक्ति यश और प्रसिद्धि की कामना करता है, वह आध्यात्मिक लक्ष्य से भटक जाता है।

धर्मसभा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने आचार्य श्री के मंगल प्रवचन का लाभ लिया तथा वैरागी ब्रह्मचारियों के उज्ज्वल आध्यात्मिक जीवन की मंगलकामना की।

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