दिगंबर जैन मंदिर रसाल में मुनि श्री 108 सुवध्य सागर महाराज के सान्निध्य में वेदी एवं शिखर निष्ठापन कार्यक्रम श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कलशाभिषेक, शांतिधारा, याग मंडल विधान सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पढ़िए श्रीफल साथी सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट।
रसाल। दिगंबर जैन मंदिर रसाल में मंदिर जीर्णोद्धार के अंतर्गत वेदी एवं शिखर निष्ठापन महोत्सव का आयोजन मुनि श्री 108 सुवध्य सागर महाराज के सान्निध्य तथा पंडित अमित शास्त्री (जबलपुर) के निर्देशन में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।
धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन
प्रातः 7 बजे कलशाभिषेक, शांतिधारा, पूजन एवं याग मंडल विधान का शुभारंभ हुआ। विधान के दौरान ध्वजारोहण का सौभाग्य लालचंद, कमलकुमार, सुभाषचंद एवं पियूष पहाड़िया परिवार को प्राप्त हुआ।
इंद्र बनने का मिला सौभाग्य
विधान में सोधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य मंजू देवी–सुभाष पहाड़िया परिवार, ईशान इंद्र लालमणी–ज्ञानचंद अजमेरा परिवार, शांति देवी परिवार, संतोष देवी–सुरेश कुमार पांड्या परिवार, चंदा–माणकचंद काला परिवार तथा सीमा–राजकुमार पांड्या एवं बबीता–अशोक कुमार अजमेरा परिवार सहित अनेक श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ।
भगवान की प्रतिमाओं का विराजमान
अस्थायी वेदी पर मूलनायक भगवान सुपार्श्वनाथ एवं भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमाओं को विराजमान करने का सौभाग्य लालचंद, कमलकुमार, दुलीचंद, दीपक डोसी (मुंबई) परिवार तथा लालचंद, जितेंद्र, नीरज एवं चिराग पहाड़िया परिवार को प्राप्त हुआ।
400 वर्ष प्राचीन अतिशयकारी जिनालय
अशोक अजमेरा ने बताया कि यह लगभग 400 वर्ष प्राचीन अतिशयकारी जिनालय है। कार्यक्रम में कुचामन, लाडनूं एवं आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालुओं ने याग मंडल विधान में भाग लेकर भगवान के दर्शन एवं धर्मलाभ प्राप्त किया।
धर्म और श्रद्धा का संदेश
पूरे आयोजन में श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास का वातावरण रहा। मंदिर जीर्णोद्धार के इस महत्त्वपूर्ण आयोजन ने समाज में धर्म, संस्कृति और एकता की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया।













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