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मेवाड़-वागड़ की सबसे बड़ी भगवान मुनिसुव्रतनाथ प्रतिमा का 10 जुलाई को होगा भव्य मंगल प्रवेश : ड्रोन से होगी रत्न-पुष्पवर्षा, हाथी करेगा प्रथम श्रीफल अर्पण


निर्माणाधीन सुखोदय तीर्थ नसियाजी, नौगामा में भगवान मुनिसुव्रतनाथ की 21 फीट ऊंची श्यामवर्ण प्रतिमा का 10 से 12 जुलाई तक भव्य मंगल प्रवेश एवं स्थापना महोत्सव आयोजित होगा। आयोजन में ड्रोन से रत्न-पुष्पवर्षा और हाथी द्वारा प्रथम श्रीफल अर्पण प्रमुख आकर्षण रहेंगे। पढ़िए श्रीफल साथी सुरेश चंद्र गांधी की यह रिपोर्ट।


नौगामा। वागड़ क्षेत्र के जैन समाज के लिए 10 से 12 जुलाई तक ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन होने जा रहा है। निर्माणाधीन सुखोदय तीर्थ नसियाजी में भगवान मुनिसुव्रतनाथ की 21 फीट ऊंची श्यामवर्ण प्रतिमा का भव्य मंगल प्रवेश एवं स्थापना महोत्सव आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद, निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद तथा प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया (सुयश, अशोकनगर) के सान्निध्य में सम्पन्न होगा।

बजरंगगढ़ से प्रारंभ होगा मंगल विहार

वास्तुविद श्रीपाल जैन एवं प्रवक्ता सुरेश चंद्र गांधी ने बताया कि भगवान मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा को पहले बजरंगगढ़ तीर्थ (गुना) ले जाया जाएगा, जहां मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के समक्ष प्रतिमा का अवलोकन एवं तिलक संस्कार होगा। इसके बाद प्रतिमा का मंगल विहार प्रारंभ किया जाएगा।

10 जुलाई को वागड़ में होगा भव्य प्रवेश

10 जुलाई को प्रातः 7 बजे प्रतिमा का वागड़ क्षेत्र में भव्य प्रवेश होगा। बांसवाड़ा में समाजजन स्वागत करेंगे। शोभायात्रा कलेक्ट्रेट चौराहा, पुराना बस स्टैंड, कस्टम चौराहा, बाहुबली कॉलोनी एवं खांडू कॉलोनी होते हुए वीरोदय तीर्थ पहुंचेगी। कलेक्ट्रेट चौराहे पर जिला प्रशासन द्वारा कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक प्रतिमा की अगवानी करेंगे। रात्रि विश्राम वीरोदय तीर्थ पर होगा, जहां भक्ति संध्या एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

12 जुलाई को स्थापना महोत्सव

11 जुलाई को प्रतिमा का स्वागत बड़ोदिया, कलिंजरा एवं बागीदौरा में किया जाएगा। 12 जुलाई को प्रातः शोभायात्रा के साथ प्रतिमा सुखोदय तीर्थ नसियाजी पहुंचेगी, जहां दोपहर 12 बजे विधि-विधान के साथ भगवान मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा की स्थापना की जाएगी।

ड्रोन से होगी रत्न-पुष्पवर्षा

स्थापना महोत्सव के दौरान ड्रोन के माध्यम से प्रतिमा पर रत्न एवं पुष्पवर्षा की जाएगी। आयोजन का विशेष आकर्षण जयपुर से आने वाले हाथी द्वारा भगवान के चरणों में प्रथम श्रीफल अर्पित करना होगा। इसके बाद श्रद्धालु क्रमवार श्रीफल अर्पित करेंगे।

21 फीट ऊंची और 25 टन वजनी प्रतिमा

आयोजकों के अनुसार भगवान मुनिसुव्रतनाथ की कमलासन सहित प्रतिमा 21 फीट ऊंची, 12 फीट चौड़ी एवं लगभग 25 टन वजनी है। प्रतिमा के लिए 11 टन वजनी विशाल कमलासन भी तैयार कराया गया है। पूरे नगर एवं मंदिर परिसर को आकर्षक सजावट से सजाया जाएगा तथा विहार मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालु स्वागत एवं वंदन करेंगे।

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