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धर्म जागृति संस्थान के सहयोग से मिथिलापुरी में बन रहा 'आचार्य विद्यानन्द सभागार' : युवा वर्ग के आध्यात्मिक निर्माण का बनेगा केंद्र


नेपाल सीमा के समीप स्थित पावन जैन तीर्थ मिथिलापुरी (सुरसंड) में आचार्य श्री 108 वसुनंदी महामुनिराज की प्रेरणा से “आचार्य विद्यानन्द जी सभागार” का निर्माण कार्य तेज गति से जारी है। यह सभागार धर्म, संस्कार और युवा जागरण का प्रमुख केंद्र बनेगा। पढ़िए श्रीफल साथी राजस्थान ब्यूरो की यह रिपोर्ट।


जयपुर/सुरसंड (सीतामढ़ी)। नेपाल सीमा के समीप स्थित जैन धर्म के पावन तीर्थ मिथिलापुरी (सुरसंड) में, जहाँ भगवान मल्लिनाथ एवं भगवान नमिनाथ के आठ कल्याणकों की पावन स्मृतियाँ जुड़ी हैं, वहाँ आचार्य श्री 108 वसुनंदी महामुनिराज की प्रेरणा एवं मंगल आशीर्वाद से अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान के सहयोग तथा श्री मिथिलापुरी जी दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र के तत्वावधान में “आचार्य विद्यानन्द जी सभागार” का निर्माण कार्य तेज गति से प्रगति पर है।

धर्म और संस्कार का बनेगा सशक्त केंद्र

परियोजना के संरक्षक पराग जैन (पटना), ई. भूपेंद्र जैन (दिल्ली), योगेश जैन (मेरठ) एवं पदम जैन बिलाला (जयपुर) ने बताया कि यह सभागार केवल एक भवन नहीं होगा, बल्कि धर्म, संस्कृति, संस्कार, शिक्षा, स्वाध्याय, प्रवचन, व्यक्तित्व विकास एवं सामाजिक जागरण का सशक्त केंद्र बनेगा।

युवा पीढ़ी को मिलेगा मार्गदर्शन

उन्होंने बताया कि विशेष रूप से युवा वर्ग के आध्यात्मिक, नैतिक एवं चारित्रिक निर्माण को ध्यान में रखकर इस सभागार की परिकल्पना की गई है। यहां नियमित धार्मिक, शैक्षणिक एवं प्रेरणात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।

निर्माण कार्य तेज गति से जारी

तीर्थ क्षेत्र के प्रबंधक मनमोहन जैन एवं पंकज जैन ने बताया कि सभागार का निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है और इसे शीघ्र पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पुण्य योजना को देशभर से समाज के विभिन्न वर्गों का उत्साहजनक सहयोग प्राप्त हो रहा है।

समाज से सहयोग का आह्वान

आयोजकों ने बताया कि जो श्रद्धालु इस सेवा परियोजना में सहयोग करना चाहते हैं अथवा अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, वे परियोजना संरक्षक पराग जैन से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने समाज से इस धर्म एवं संस्कार निर्माण की योजना में सहभागी बनने की अपील की।

समाज जागरण की प्रेरक पहल

आचार्य विद्यानन्द सभागार के निर्माण को जैन समाज में शिक्षा, संस्कार, आध्यात्मिक जागरण एवं सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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