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पुण्योदय तीर्थ बजरंगगढ़ में मुनि पुंगव सुधासागर जी ने प्रदान की ऐलक दीक्षा : पंचकल्याणक महोत्सव में श्रद्धालुओं की उमड़ी आस्था


पुण्योदय तीर्थ बजरंगगढ़ में आयोजित पंचमुखी पंचकल्याणक महोत्सव के दौरान निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने क्षुल्लक श्री सुधीरसागर जी महाराज को ऐलक दीक्षा प्रदान की। दीक्षा कल्याणक पर धर्मसभा में संयम, रत्नत्रय और पूज्यता के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया। पढ़िए श्रीफल साथी राजीव सिंघई की यह रिपोर्ट।


गुना। जिले के प्रमुख जैन तीर्थ अतिशय क्षेत्र पुण्योदय तीर्थ, बजरंगगढ़ में आयोजित पंचमुखी पंचकल्याणक महोत्सव के दौरान दीक्षा कल्याणक श्रद्धा एवं भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का स्मरण करते हुए निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने क्षुल्लक श्री सुधीरसागर जी महाराज को ऐलक दीक्षा प्रदान की। दीक्षा के साथ ही पूरा परिसर श्रद्धालुओं के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।

विधि-विधान से संपन्न हुए दीक्षा संस्कार

प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के मंत्रोच्चार के बीच भगवान के समक्ष विधिपूर्वक दीक्षा संस्कार सम्पन्न हुए। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन का साक्षी बनकर दीक्षा महोत्सव का पुण्य लाभ प्राप्त किया।

एक वर्ष से भी कम समय में तीसरी ऐलक दीक्षा

मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने बताया कि गत वर्ष दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने एक साथ 14 ऐलक दीक्षाएं प्रदान की थीं। इसके बाद पंचकल्याणक महोत्सव के प्रथम चरण में ऐलक सुमंगलसागर जी महाराज एवं क्षुल्लक शुभम सागर जी महाराज को दीक्षा दी गई। एक वर्ष से भी कम समय में यह तीसरा अवसर है जब उनके करकमलों से ऐलक दीक्षा सम्पन्न हुई।

संयम और रत्नत्रय पालन का दिया संदेश

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि वर्तमान काल में मनुष्य को हर समय किसी न किसी प्रकार का भय बना रहता है। उन्होंने कहा कि भौतिक संपन्नता के बावजूद व्यक्ति चिंताओं से मुक्त नहीं हो पाता। ऐसे समय में रत्नत्रय—सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र—का पालन ही जीवन को सार्थक और उज्ज्वल बना सकता है।

दीक्षा पूज्यता की ओर पहला कदम

मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य अपने श्रेष्ठ आचरण और संयम के माध्यम से जीवन को आदर्श बना सकता है। उन्होंने बताया कि दीक्षा केवल वेश परिवर्तन नहीं, बल्कि आत्मकल्याण और पूज्यता की दिशा में बढ़ाया गया महत्वपूर्ण कदम है। संयममय जीवन ही आत्मोन्नति का वास्तविक मार्ग है।

श्रद्धालुओं की रही बड़ी सहभागिता

दीक्षा कल्याणक के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाजजन एवं धर्मप्रेमी उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक उल्लास, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा

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