राजधानी दिल्ली के कृष्णानगर जैन मंदिर से श्री नेमि गिरनार धर्मयात्रा का शुभारंभ हुआ। आचार्य विमर्शसागर जी महाराज के सान्निध्य में प्रारंभ हुई यह यात्रा 20 जुलाई को गिरनार जी पहुंचेगी, जहां श्रद्धालु निर्वाण लाडू अर्पित करेंगे। पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की यह रिपोर्ट।
दिल्ली। जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ की निर्वाण भूमि सिद्धक्षेत्र श्री गिरनार जी में निर्वाण लाडू अर्पित करने के उद्देश्य से 25 जून को राजधानी दिल्ली स्थित कृष्णानगर जैन मंदिर से भव्य “श्री नेमि गिरनार धर्मयात्रा” का शुभारंभ हुआ। यह यात्रा परम पूज्य जिनागम पंथ प्रवर्तक भावलिंगी संत दिगम्बराचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज ससंघ (33 पिच्छी) के मंगल सान्निध्य में प्रारंभ हुई।
यात्रा का भव्य शुभारंभ
विश्व जैन संगठन के नेतृत्व एवं श्री संजय जैन के संयोजकत्व में प्रारंभ हुई यह धर्मयात्रा 25 दिनों तक देश के विभिन्न नगरों, तीर्थक्षेत्रों और धार्मिक स्थलों से होकर गुजरेगी। यात्रा का मुख्य उद्देश्य भगवान नेमिनाथ के निर्वाण कल्याणक की प्रभावना एवं जैन तीर्थों के प्रति श्रद्धा का जागरण है।
20 जुलाई को पहुंचेगी गिरनार जी
आयोजकों के अनुसार यह धर्मयात्रा 20 जुलाई 2026 को सिद्धक्षेत्र श्री गिरनार जी पहुंचेगी। इस अवसर पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु पांचवीं टोंक पर भगवान नेमिनाथ के चरणों में निर्वाण लाडू अर्पित करेंगे और पुण्यार्जन का लाभ प्राप्त करेंगे।
पिछले वर्ष भी हुआ था आयोजन
विगत वर्ष भी दिगम्बराचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज के ससंघ सान्निध्य में यह धर्मयात्रा बलबीर नगर से प्रारंभ होकर गिरनार जी पहुंची थी। इस वर्ष कृष्णानगर जैन मंदिर को इस ऐतिहासिक धर्मयात्रा के शुभारंभ का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
आचार्यश्री ने दिया प्रेरक संदेश
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ने कहा कि हमारी पहचान हमारे तीर्थों से है। सम्पूर्ण विश्व में जैन धर्म के जितने प्राचीन और महत्वपूर्ण तीर्थ हैं, वे हमारी गौरवशाली परंपरा और संस्कृति के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि श्री गिरनार जी भगवान नेमिनाथ की निर्वाण स्थली है और यह प्रत्येक जैन श्रद्धालु की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
स्वप्न में हुए भगवान के दर्शन
आचार्यश्री ने अपने उद्बोधन में एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व रात्रि में उन्हें स्वप्न में एक प्राचीन जिनालय के दर्शन हुए, जहां एक दिव्य जिनप्रतिमा एवं समीप अंबिका माता की प्रतिमा विराजमान थी। स्वप्न में उन्हें यह अनुभूति हुई कि यह भगवान नेमिनाथ की प्रतिमा है और यहां उनकी महती प्रभावना होने वाली है। इस दिव्य अनुभव ने उन्हें अत्यंत आनंद और उत्साह से भर दिया।
यात्रा की सफलता का आशीर्वाद
आचार्यश्री ने कहा कि यह प्रभु की विशेष कृपा है कि उन्हें पुनः इस धर्मयात्रा का शुभारंभ कराने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने सभी यात्रियों और श्रद्धालुओं को मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह धर्मयात्रा धर्मप्रभावना, भक्ति और आध्यात्मिक जागरण का नया अध्याय स्थापित करेगी।
श्रद्धालुओं में उत्साह
धर्मयात्रा के शुभारंभ अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाजजन और धर्मप्रेमी उपस्थित रहे। सभी ने भगवान नेमिनाथ के जयघोष के साथ यात्रा को विदाई दी और इसकी सफल एवं मंगलमय पूर्णता की कामना की। यात्रा को लेकर दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।













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