श्रुत पंचमी के अवसर पर दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय, छत्रपति नगर में दिगंबर जैन महिला परिषद अंजना संभाग आदिनाथ शाखा द्वारा श्रुत स्कंध विधान का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से जिनवाणी आराधना करते हुए 64 अर्घ्य समर्पित किए। पढ़िए इंदौर रिपोर्ट
इंदौर। दिगंबर जैन परंपरा के सर्वाधिक प्राचीन एवं प्रामाणिक ग्रंथ षट्खण्डागम की रचना एवं संरक्षण की स्मृति में मनाए जाने वाले श्रुत पंचमी पर्व पर दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय, छत्रपति नगर में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ श्रुत स्कंध विधान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन दिगंबर जैन महिला परिषद अंजना संभाग, आदिनाथ शाखा द्वारा किया गया।
षट्खण्डागम जैन कर्म दर्शन का आधार
श्रुत पंचमी जैन समाज का ज्ञान आराधना दिवस माना जाता है। आचार्य पुष्पदंत एवं आचार्य भूतबली द्वारा रचित षट्खण्डागम जैन कर्म दर्शन का आधारभूत ग्रंथ है। इसी महान ग्रंथ की स्मृति में प्रतिवर्ष ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी को समाज द्वारा श्रुत पंचमी पर्व मनाया जाता है।
अभिषेक एवं शांतिधारा से हुआ शुभारंभ
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकाल नित्य नियम पूजन, अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ हुआ। शांतिधारा करने का सौभाग्य श्री संगीत जैन एवं सचिन देवेंद्र जैन को प्राप्त हुआ।
रजत कलश स्थापना एवं ग्रंथराज विराजमान
विधान प्रारंभ होने से पूर्व महिला परिषद की श्रीमती रजनी जैन, मनीषा जैन, मीना जैन एवं सुषमा जैन ने मंडलजी पर चार रजत मंगल कलश स्थापित किए। वहीं श्रीमती सुनीता नरेंद्र नायक ने मंडलजी पर ग्रंथराज षट्खण्डागम को विराजमान करने का सौभाग्य प्राप्त किया।
64 अर्घ्यों से हुई जिनवाणी आराधना
युवा विद्वान पंडित मनीष जैन के निर्देशन में सम्पन्न हुए श्रुत स्कंध विधान में श्रद्धालुओं ने उत्साह एवं भक्तिभाव के साथ भाग लिया। विधान पूजन के दौरान मंडलजी पर 64 अर्घ्य समर्पित कर जिनवाणी माता की आराधना की गई। पूरे आयोजन के दौरान वातावरण धर्ममय एवं भक्तिमय बना रहा।
अनेक समाजश्रेष्ठी रहे उपस्थित
इस अवसर पर महिला परिषद इंदौर संभाग की अध्यक्ष श्रीमती मुक्ता जैन, पिंकी रेनबो, मनीषा टारगेट, समता सोधिया, सुरेखा रसिया, सुनीता देवरी, रविदेवी जैन, अजय-आजाद मामा, डी.एल. जैन, वीरेंद्र जैन, रमेश जैन, डॉ. जैनेंद्र जैन, अरविंद सोधिया, अखिलेश सोधिया, आलोक नेता एवं डॉ. वी.सी. जैन सहित अनेक समाजश्रेष्ठी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
श्रुत पंचमी पर्व के इस आयोजन के माध्यम से समाजजनों ने जिनवाणी के अध्ययन, संरक्षण एवं आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।













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